Baghpat Wire

बागपत की ताज़ा खबरें | बड़ौत, खेकड़ा, छपरौली और उत्तर प्रदेश

Advertisement

विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई सांसदों की बैठक, विपक्षी दलों ने किया बहिष्कार

चेन्नई, 09 अगस्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर सांसदों की एक विशेष बैठक बुलाई है।
श्री विजय इस कदम के ज़रिए उन राजनीतिक दलों को बेनकाब करने की कोशिश कर रहे हैं जो धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपने संबंध बढ़ा रहे हैं।
परिसीमन विधेयक को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बार-बार बदलते रुख के बीच श्री विजय ने उसे घेरने का मौका नहीं छोड़ा। द्रमुक ने पहले सहयोग की बात कही थी, लेकिन अब वह इसका विरोध कर रही है।
यह कदम उस समय उठाया गया है, जब खबरें आई थीं कि भाजपा ने संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए द्रमुक समेत कई दलों से संपर्क किया था।
उम्मीद के मुताबिक, तमिलनाडु से सांसदों का सबसे बड़ा समूह रखने वाली द्रमुक (लोकसभा में 22 और उच्च सदन में 8) तथा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) (उच्च सदन में पांच सांसद) ने इस बैठक का बहिष्कार कर दिया। दोनों ही दलों ने कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर बनाए जाने वाले प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के मुद्दे पर तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।
बहिष्कार को सही ठहराते हुए द्रमुक संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने कहा, “हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, हम निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में हैं। सांसदों की यह बैठक कावेरी मुद्दे से ध्यान भटकाने की एक रणनीति मात्र है।”
सुश्री कनिमोझी ने पूछा, “जब मौजूदा सत्र में परिसीमन विधेयक पेश किए जाने की कोई बात ही नहीं है, तो फिर इस तरह की बैठक की क्या जरूरत है?”
सुश्री कनिमोझी ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून लाने से पहले आमतौर पर पार्टियों से बात करती है, लेकिन अभी तक सरकार ने उनकी पार्टी से संपर्क नहीं किया है।
द्रमुक नेता ने कहा, “राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। अगर कोई कदम तमिलनाडु के हित में है, तो हम उसका स्वागत करेंगे। अपने पार्टी अध्यक्ष के नेतृत्व में हम परिसीमन प्रक्रिया में तमिलनाडु के लिए अधिक से अधिक सीटों की मांग के लिए प्रयास कर रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद अब द्रमुक की यह मजबूरी है कि वह केंद्र सरकार के साथ अपने संबंध संतुलित रखे और राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बनी रहे। लेकिन इसके साथ ही यह जोखिम भी है कि भाजपा के साथ दिखने पर उसका अल्पसंख्यक वोट बैंक उससे छिटक सकता है और उसकी धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुँच सकता है। यही वह कमजोरी है जहाँ श्री विजय, द्रमुक को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *