जयपुर, 23 सितंबर 2026: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने वाली एक महिला को अपने दिवंगत पति के माता-पिता की आर्थिक मदद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को महिला के मासिक वेतन का 25 प्रतिशत काटकर सीधे उसकी सास के खाते में जमा कराने का आदेश दिया है। साथ ही, मृतक कर्मचारी के बकाया टर्मिनल लाभ का 50 प्रतिशत हिस्सा उसके माता-पिता को देने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
पति की मौत के बाद मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं का बेटा अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था। परिवार के अनुसार, वह घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियुक्ति इस आधार पर हुई थी कि मृतक की पत्नी परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों की भी देखभाल करेगी।
दूसरी शादी और ससुराल छोड़ने का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नौकरी मिलने के बाद महिला ने अपने ससुराल और बुजुर्ग सास-ससुर की देखभाल करना बंद कर दिया। इसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली और कथित तौर पर मृतक के माता-पिता को आर्थिक सहायता देना भी बंद कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, उनके दो अन्य बेटे बेरोजगार हैं और वे माता-पिता की आर्थिक मदद करने की स्थिति में नहीं हैं। इसी आधार पर उन्होंने बहू के वेतन और मृतक कर्मचारी के बकाया टर्मिनल लाभ में हिस्सा दिए जाने की मांग की थी।
बहू की ओर से भी रखी गई दलील
महिला की ओर से अदालत में दलील दी गई कि ससुराल में उसके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा था, जिसके कारण उसे वहां से अलग होना पड़ा। यह भी तर्क दिया गया कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल उनके अन्य दो बेटे कर सकते हैं।
महिला की ओर से यह भी कहा गया कि उसकी अपनी सैलरी और टर्मिनल लाभों को सास-ससुर के साथ साझा करने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य पर दिया जोर
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से उबरने में सहायता देना है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में परिवार की स्थिति को केवल विधवा तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता और कानून के अनुसार पात्र आश्रितों तथा मृत कर्मचारी के माता-पिता के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल की जिम्मेदारी का पहलू महत्वपूर्ण है।
पूर्व के फैसले का भी दिया हवाला
राजस्थान हाईकोर्ट ने ‘भगवान सिंह बनाम सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, पावस, अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड’ मामले में दिए गए पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, उस मामले में कहा गया था कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति पर परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल की नैतिक जिम्मेदारी होती है और लाभार्थी परिवार के अन्य आश्रितों की अनदेखी नहीं कर सकता।
मौजूदा मामले में अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और प्रतिवादी के आचरण पर विचार करने के बाद याचिका स्वीकार कर ली।
सैलरी का 25% और टर्मिनल लाभ का 50% देने का आदेश
अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि प्रतिवादी के मासिक वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा काटकर सीधे याचिकाकर्ताओं के खाते में जमा किया जाए।
इसके अलावा, अदालत ने मृतक कर्मचारी के बकाया टर्मिनल लाभ का 50 प्रतिशत हिस्सा भी याचिकाकर्ताओं को जारी करने का निर्देश दिया।
इन निर्देशों के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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