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MRP ₹18 की पानी की बोतल ₹25 में बेची, उपभोक्ता आयोग ने लगाया ₹7 लाख का जुर्माना

काकीनाडा, 23 सितंबर 2026: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने अन्नवरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी देवस्थानम परिसर में संचालित एक लाइसेंसी दुकान के खिलाफ आदेश जारी करते हुए दुकानदार को ₹7 लाख की दंडात्मक क्षतिपूर्ति उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने दुकानदार को ग्राहक से वसूली गई अतिरिक्त ₹7 की राशि वापस करने, शिकायतकर्ता को ₹10,000 मुआवजा देने और ₹5,000 मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।

₹18 की बोतल के लिए वसूले गए ₹25

मामला शिकायतकर्ता डी. वेंकटेश्वर राव से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने 22 फरवरी 2026 को अन्नवरम मंदिर परिसर में एक लाइसेंसी दुकान से एक लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बोतल खरीदी थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, बोतल पर निर्माता की ओर से ₹18 MRP अंकित थी, लेकिन दुकानदार ने उनसे इसके लिए ₹25 वसूले। भुगतान UPI के माध्यम से किया गया।

शिकायतकर्ता का कहना था कि जब उन्होंने निर्धारित MRP से अधिक राशि लिए जाने पर सवाल उठाया तो दुकानदार ने कथित तौर पर यह दावा किया कि उसे मंदिर परिसर में MRP से अधिक कीमत वसूलने की अनुमति है।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष उठाया।

दुकानदार ने ओवरचार्जिंग से किया इनकार

सुनवाई के दौरान दुकानदार ने पानी की बोतल के लिए MRP से अधिक राशि वसूलने से इनकार किया। उसकी ओर से दलील दी गई कि ₹25 का UPI भुगतान केवल पानी की बोतल के लिए नहीं था, बल्कि इसमें कोल्ड ड्रिंक और बिस्किट सहित अन्य सामान की खरीद भी शामिल थी।

आयोग ने दुकानदार के इस बचाव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि दुकानदार की दलील में विरोधाभास था। एक तरफ दुकानदार ने पानी की बोतल की बिक्री से संबंधित अतिरिक्त कीमत वसूलने से इनकार किया, वहीं दूसरी तरफ उसी भुगतान को अन्य सामान की खरीद से जोड़ने का प्रयास किया गया।

बिल और सीसीटीवी रिकॉर्ड नहीं किया गया पेश

आयोग ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड पर भी गौर किया। दुकानदार की ओर से यह साबित करने के लिए बिल, सीसीटीवी फुटेज या अन्य संबंधित रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए कि ₹25 का भुगतान वास्तव में पानी की बोतल के साथ अन्य वस्तुओं की खरीद के लिए किया गया था।

इन परिस्थितियों में आयोग ने दुकानदार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला और शिकायतकर्ता के इस दावे को स्वीकार किया कि ₹18 MRP वाली पानी की बोतल के लिए ₹25 वसूले गए थे।

इस तरह ग्राहक से निर्धारित MRP से ₹7 अधिक राशि वसूले जाने की बात आयोग के समक्ष स्थापित हुई।

MRP से अधिक कीमत वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार

आयोग ने अपने आदेश में निर्धारित MRP से अधिक कीमत वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी के रूप में देखा।

आयोग ने यह भी माना कि तीर्थस्थलों जैसे स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और उपभोक्ता आते हैं। ऐसी जगहों पर केवल अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, क्योंकि अधिक कीमत वसूलने की व्यवस्था का व्यापक उपभोक्ता प्रभाव हो सकता है।

इसी आधार पर आयोग ने व्यक्तिगत शिकायतकर्ता को राहत देने के अलावा ₹7 लाख की दंडात्मक क्षतिपूर्ति लगाने का आदेश दिया।

मंदिर प्रशासन को नहीं बनाया मौद्रिक रूप से जिम्मेदार

मामले में मंदिर प्रशासन की भूमिका पर भी विचार किया गया। मंदिर प्रशासन ने बताया कि संबंधित दुकान एक स्वतंत्र लाइसेंसी द्वारा संचालित की जा रही थी और मंदिर प्रशासन ने दुकानदार को MRP से अधिक कीमत वसूलने की अनुमति नहीं दी थी।

आयोग ने मंदिर प्रशासन पर इस मामले में कोई मौद्रिक दायित्व नहीं डाला।

हालांकि, आयोग ने लाइसेंसिंग प्राधिकरण के रूप में मंदिर प्रशासन को उपभोक्ताओं के हित में कुछ कदम उठाने के निर्देश दिए।

सभी दुकानों पर MRP प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश

आयोग ने मंदिर प्रशासन से कहा कि परिसर में संचालित सभी लाइसेंसी दुकानों पर MRP की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए।

इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए प्रभावी शिकायत व्यवस्था उपलब्ध कराने और सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से यह जानकारी देने को कहा गया कि किसी भी वस्तु के लिए निर्धारित MRP से अधिक भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।

इसका उद्देश्य मंदिर परिसर में आने वाले उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना और भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकना है।

दुकानदार को 45 दिनों में करना होगा भुगतान

जिला उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार को आदेश के सभी निर्देशों का 45 दिनों के भीतर पालन करने को कहा है।

आदेश के अनुसार, निर्धारित अवधि में भुगतान या अन्य निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित मौद्रिक राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।

दुकानदार को शिकायतकर्ता को ₹7 की अतिरिक्त वसूली वापस करने के साथ ₹10,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमेबाजी खर्च देना होगा। इसके अलावा ₹7 लाख की दंडात्मक क्षतिपूर्ति उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करनी होगी।

उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश?

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि पैकेज्ड वस्तुओं पर अंकित MRP से अधिक कीमत वसूले जाने पर उपभोक्ता शिकायत कर सकता है। खास तौर पर पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर जहां उपभोक्ता अक्सर तत्काल खरीदारी करते हैं, वहां दुकानदारों द्वारा निर्धारित कीमत का पालन करना उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

काकीनाडा जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश में व्यक्तिगत उपभोक्ता को अतिरिक्त राशि की वापसी और मुआवजे के साथ-साथ दंडात्मक क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। साथ ही मंदिर प्रशासन को भी लाइसेंसी दुकानों की निगरानी और उपभोक्ता शिकायत व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस मामले में आयोग का आदेश यह स्पष्ट करता है कि MRP से अधिक कीमत वसूलने की शिकायत केवल अतिरिक्त ₹7 की वसूली तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत व्यापक राहत और दंडात्मक कार्रवाई का आधार भी बन सकती है।

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