19 सितंबर 2026
नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं। इन बदलावों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
नए प्रावधानों के तहत पंजीकरण में देरी होने पर अलग-अलग स्तर पर सक्षम अधिकारी के आदेश की आवश्यकता होगी। खास तौर पर लंबे समय से लंबित पंजीकरण के मामलों में सत्यापन और निगरानी की व्यवस्था को अधिक सख्त किया गया है।
2 साल से अधिक की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में 2 वर्ष से अधिक की देरी हो जाती है, तो पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश आवश्यक होगा।
1 से 2 साल की देरी पर DM या SDM का आदेश
वहीं, यदि पंजीकरण में 1 वर्ष से अधिक लेकिन 2 वर्ष तक की देरी होती है, तो पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही किया जा सकेगा।
इस प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क के साथ आवश्यक सत्यापन भी किया जाएगा।
देरी से होने वाले पंजीकरण पर बढ़ेगी निगरानी
संशोधन का उद्देश्य लंबे समय के बाद होने वाले जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण में अधिक सत्यापन और निगरानी सुनिश्चित करना है, ताकि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहे और गलत या संदिग्ध प्रविष्टियों पर नियंत्रण किया जा सके।
मॉनसून सत्र के दौरान संसद में Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 पारित किया गया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसके प्रावधानों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया जा रहा है।














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