5 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जारी राजनीतिक टकराव के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 10 अक्टूबर से प्रस्तावित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है। सीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से संभावित गिरफ्तारियां या पुलिस कार्रवाई युवाओं के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को रोक नहीं पाएंगी। पार्टी ने 10 अक्टूबर को बड़े जन आंदोलन का आह्वान करते हुए देशभर में प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि सरकार उन्हें, पार्टी नेताओं अभिजीत, आशुतोष, रत्ना और अन्य नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। दास ने कहा कि यदि सरकार यह सोचती है कि इस तरह की कार्रवाई से आंदोलन को रोका जा सकता है तो वह गलतफहमी में है। उन्होंने दावा किया कि युवा पीढ़ी जाग चुकी है और कथित तानाशाही कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगी।

यह बयान उन पुलिस कार्रवाइयों के बाद सामने आया है, जिनमें SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सीजेपी ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया है, जबकि पुलिस और सरकार की ओर से नियमों तथा कानून-व्यवस्था के पालन पर जोर दिया जा रहा है।

सौरभ दास का दावा- गिरफ्तारियों से नहीं रुकेगा आंदोलन

सौरभ दास ने X पर अपनी पोस्ट में सरकार की कथित कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि सरकार सीजेपी के कई नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। दास ने कहा कि पार्टी के नेता किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

दास के अनुसार, पार्टी के सदस्यों ने पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए खुद को तैयार रखा है। उन्होंने समर्थकों और नागरिकों से अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के नेता एक साथ मौजूद न भी हों, तब भी लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखना चाहिए। दास ने यह भी दावा किया कि युवा पीढ़ी इस तरह की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगी।

सीजेपी प्रवक्ता ने आगामी आंदोलन को बड़े जन आंदोलन के रूप में पेश करते हुए लोगों से 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील की। उनके मुताबिक, प्रदर्शन जारी रहना चाहिए और देश के लोगों को इसमें भाग लेना चाहिए।

अभिजीत दिपके का अमित शाह से सवाल

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने भी 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने X पर सवाल करते हुए लिखा कि यदि सरकार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना चाहती है तो वह कितने लोगों को गिरफ्तार करेगी।

दिपके ने कहा कि 10 अक्टूबर को पूरा देश विरोध प्रदर्शन के लिए आने वाला है। सीजेपी ने नागरिकों से SIR विवाद के बाद बड़े विरोध प्रदर्शन के लिए एकजुट होने की अपील की है।

दिपके और सौरभ दास के बयान सीजेपी के राजनीतिक रुख को दर्शाते हैं। पार्टी का दावा है कि संभावित पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारियों से आंदोलन कमजोर होने के बजाय और तेज हो सकता है।

दिल्ली प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा

पुलिस सूत्रों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में हुए एक प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के करीब 15 जवानों के घायल होने की बात सामने आई। इनमें कुछ महिला पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के सिलसिले में करीब 110 लोगों को हिरासत में लिया गया। इन घटनाओं के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

सीजेपी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को आंदोलन दबाने की कोशिश बताया, जबकि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर निकला मार्च

इससे पहले रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च निकाला। मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।

मार्च का नेतृत्व IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और वे सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। रास्ते में बैरिकेड लगाए गए थे और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।

उदय भानु चिब ने सरकार पर लगाया संरक्षण देने का आरोप

IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने पर दिल्ली पुलिस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार को संरक्षण दे रही है।

चिब ने कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जाना चाहते हैं और उनके अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान पर जाने से उन्हें नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जाएंगे।

चिब ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि सरकार दबाव में है और विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों तथा कथित सबूतों के सामने आने के बाद जवाबदेही का समय आ गया है।

उन्होंने राहुल गांधी द्वारा पिछले डेढ़ साल से कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जाने का भी उल्लेख किया। हालांकि, चिब द्वारा लगाए गए ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

रोशनी जायसवाल ने भी सरकार पर लगाए आरोप

IYC की राष्ट्रीय सचिव रोशनी जायसवाल ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

जायसवाल ने दावा किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई।

वहीं, IYC लीगल टीम के राष्ट्रीय समन्वयक चितवन गोदारा ने भी तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष और प्रदर्शनकारी तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।

गोदारा ने सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की और कहा कि प्रदर्शन जारी रहेगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विवाद तेज

ज्ञानेश कुमार को लेकर मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी प्रणालियों से संबंधित निर्णयों को लेकर 10 महीनों की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर औपचारिक रूप से आपत्तियां उठाई थीं।

इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने इस रिपोर्ट को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज किया कि रिपोर्ट में बताई गई आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति के बराबर थीं।

चुनाव आयोग ने कहा- निर्णय सर्वसम्मति से हुए

चुनाव आयोग ने कहा कि मसौदा तैयार करने के चरण में उठाए गए परिचालन संबंधी सवाल, सुझाव और इनपुट उसकी सामान्य प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं को अंतिम निर्णयों में संस्थागत असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभ्यास के कार्यक्रम से जुड़े निर्णयों को लेकर कहा कि ये फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

इस बयान के बाद चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद का एक प्रमुख बिंदु यही बन गया है कि क्या आंतरिक स्तर पर उठाई गई आपत्तियां संस्थागत असहमति को दर्शाती हैं या वे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थीं।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर

अब 10 अक्टूबर के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर है। सीजेपी ने इसे बड़े जन आंदोलन के रूप में पेश किया है और पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि गिरफ्तारियां आंदोलन को रोकने में सफल नहीं होंगी।

सौरभ दास ने कहा है कि युवा पीढ़ी जाग चुकी है और पार्टी के नेता किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। वहीं अभिजीत दिपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को यदि पूरा देश प्रदर्शन के लिए आता है तो सरकार कितने लोगों को गिरफ्तार करेगी।

दूसरी ओर, दिल्ली में पहले ही प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति सामने आ चुकी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जवानों के घायल होने और लोगों को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

फिलहाल, SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी इसे लोकतंत्र तथा मतदाता अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। अब 10 अक्टूबर को प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन इस विवाद की अगली बड़ी कड़ी बन सकता है।

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