5 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली/मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हुए। विपक्षी दलों और नागरिक समाज समूहों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और इसे लोकतंत्र तथा मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष के आंदोलन को नियमों और अनुमति के दायरे में रखने की बात कही।

मुंबई के शिवाजी पार्क में पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद विरोध प्रदर्शन हुआ। सीजेपी और अन्य नागरिक समाज समूहों की ओर से आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

यह विरोध दिल्ली तक भी पहुंचा, जहां युवा कांग्रेस, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विपक्षी नेताओं के साथ जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन किया। यहां भी प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।

रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद

विवाद के बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े निर्णयों को लेकर 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर औपचारिक रूप से आपत्तियां उठाई थीं।

इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की अटकलों को खारिज किया। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय, जिनमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए और तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से हुए।

इस तरह एक ओर जहां विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने निर्णयों में किसी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज किया है।

मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन

मुंबई में प्रदर्शन से पहले भारी पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। दादर रेलवे स्टेशन से शिवाजी पार्क की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क पहुंचे।

सीजेपी ने पहले ही घोषणा की थी कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद 2 अक्टूबर को प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग पर चुनावी अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाए और उन्हें लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की। दास ने मुंबई के लोगों से शिवाजी पार्क पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।

अभिजीत दिपके ने पुलिस और बैरिकेडिंग पर उठाए सवाल

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने शिवाजी पार्क में सभा को संबोधित करते हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की बात कही। उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी अधिक होगी कि बैरिकेड पर्याप्त नहीं होंगे।

दिपके ने दिल्ली में एक अलग विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस के उपायुक्त सचिन शर्मा को लेकर भी आरोप लगाए और उनकी राजनीतिक संबद्धता पर टिप्पणी की। उनके इन बयानों को उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा गया।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। आयोजकों की ओर से इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया गया।

शबाना आजमी ने लोकतंत्र और मतदान अधिकार का मुद्दा उठाया

मुंबई में हुए प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी और गायक विशाल ददलानी भी शामिल हुए। आजमी ने प्रदर्शन को लोकतंत्र, लोगों के अधिकार और उनकी आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया।

आजमी ने कहा कि लोगों को बचपन से वोट डालने, अपने अधिकारों का दावा करने और अपनी आवाज उठाने की बात बताई जाती है। उनके मुताबिक, यदि लोगों के मतदान के अधिकार को छीने जाने या उसमें हेरफेर किए जाने का आरोप है, तो लोग विरोध करेंगे।

आजमी ने प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को मतदान अधिकारों में लोगों के विश्वास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संविधान ने लोगों को यह अधिकार दिया है और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर सवाल उठाना जरूरी है।

उन्होंने प्रदर्शन को लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि लोगों ने अपनी ताकत को पहचाना है और वे गलत चीजों को स्वीकार नहीं करना चाहते।

विशाल ददलानी बोले- चुनाव व्यवस्था सभी के लिए महत्वपूर्ण

गायक विशाल ददलानी ने कहा कि चुनाव व्यवस्था का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली खतरे में पड़ती है तो सभी दलों के समर्थकों को चिंतित होना चाहिए।

ददलानी ने भाजपा समर्थकों से भी इस मुद्दे पर जागरूक होने की अपील की। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने, प्रक्रिया को बदलने और SIR को खत्म करने की मांग रखी तथा हर नागरिक के वोट देने के अधिकार की रक्षा की बात कही।

‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ ने किया विरोध प्रदर्शन

सीजेपी के प्रदर्शन के जवाब में ‘जेन नेक्स्ट मुंबई’ नामक एक समूह की ओर से भी विरोध प्रदर्शन किया गया। इस समूह ने सीजेपी के आंदोलन का विरोध किया और कहा कि वे संविधान की रक्षा और सम्मान के लिए एकत्र हुए हैं।

समूह के एक प्रदर्शनकारी ने सीजेपी नेता अभिजीत दिपके के बयानों पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि दिपके जैसे लोग संविधान को भंग करने की बात करते हैं। उसने कहा कि वे बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे संविधान की रक्षा और सम्मान के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।

इससे मुंबई में एक ही मुद्दे को लेकर दो अलग-अलग पक्षों के प्रदर्शन सामने आए।

फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को बताया झूठी कहानी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीजेपी के प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों का पहले ही खंडन किया जा चुका है।

फडणवीस के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्तों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विपक्ष की ओर से पेश की जा रही कहानी बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उस कथित झूठे बयान को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं और वे इसमें सफल नहीं होंगे।

दिल्ली में जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन

मुंबई के साथ दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।

पुलिस द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने के बाद मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सौरभ भारद्वाज सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के नेता गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग के माध्यम से आम जनता के वोट छीने जा रहे हैं। वेणुगोपाल ने इसे लोकतंत्र और आम आदमी के वोट को बचाने की लड़ाई बताया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र बचाने के लिए जेल जाने को भी तैयार है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की स्थिति में भी आंदोलन जारी रहेगा।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों का किया समर्थन

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गांधी जयंती के दिन हुए प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हजारों युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।

गांधी ने प्रदर्शनकारियों की मांग को स्पष्ट बताते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया और इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है।

अखिलेश यादव ने भी सरकार और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर आरोप लगाए। यादव ने दावा किया कि दोनों ही गहन जांच के दायरे में हैं।

उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा सत्ता में रहेगी, संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष नहीं रह सकतीं। यादव ने चुनाव आयोग और सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की बात कही।

उनके ये बयान राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं।

भाजपा ने कहा- विरोध का अधिकार है, लेकिन नियमों का पालन जरूरी

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना पूरी तरह जायज है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के लिए कुछ नियम और प्रक्रियाएं हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है।

आलोक के अनुसार, प्रदर्शन के लिए अनुमति लेना जरूरी है और लोग निर्धारित नियमों के दायरे में रहकर विरोध कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में पुलिस लोगों को हिरासत में ले सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग की मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR सहित उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

मुंबई और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की लड़ाई बता रहा है, वहीं भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर जोर दे रही है।

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