5 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति सामने आई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रविवार को हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के करीब 15 जवान घायल हो गए, जबकि विरोध प्रदर्शन से जुड़े करीब 110 लोगों को हिरासत में लिया गया। सूत्रों का यह भी दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पुलिसकर्मियों को काटने से चोटें आईं।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे। युवा कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।

मार्च का नेतृत्व भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने किया। प्रदर्शन में सैकड़ों युवा कार्यकर्ता तख्तियां लेकर शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। मार्च को देखते हुए रास्ते में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए थे।

पुलिस सूत्रों का दावा- 15 जवान घायल

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के लगभग 15 जवान घायल हुए। सूत्रों ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पुलिसकर्मियों को काटने से भी चोटें आईं।

इसके साथ ही पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शन से जुड़े करीब 110 लोगों को हिरासत में लिया गया।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग की गई थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति सामने आई।

पुलिसकर्मियों के घायल होने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी के बाद दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहा राजनीतिक विवाद और तेज हो गया।

रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर निकला IYC का मार्च

इससे पहले भारतीय युवा कांग्रेस ने रविवार को रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च शुरू किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता तख्तियां लेकर मार्च में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। रास्ते में बैरिकेड लगाए गए और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना की।

चिब ने कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे और उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

चिब ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश जारी रखेंगे और अगर पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोकती है तो वे वहीं बैठकर प्रदर्शन करेंगे।

अपने बयान में चिब ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी भी की। यह टिप्पणी युवा कांग्रेस नेता का आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केंद्र सरकार पर भी लगाए आरोप

उदय भानु चिब ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार डरी हुई है और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आने के बाद उस पर दबाव बढ़ रहा है।

चिब ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह पिछले डेढ़ साल से कथित अनियमितताओं को देश के सामने उठा रहे हैं और अब इस मामले में और सबूत सामने आ रहे हैं।

उन्होंने सरकार पर युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप भी लगाया। ये सभी आरोप भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

रोशनी जायसवाल ने भी सरकार पर साधा निशाना

भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रोशनी जायसवाल ने भी प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए।

जायसवाल ने दावा किया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हर संभव तरीका अपना रही है। उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया।

जायसवाल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें जवाबदेही का सामना करना चाहिए।

उनका यह बयान भी राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आया है।

चितवन गोदारा ने की इस्तीफे की मांग

IYC लीगल टीम के राष्ट्रीय समन्वयक चितवन गोदारा ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

गोदारा ने भाजपा और उसके समर्थकों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी न्याय मिलने तक अपना विरोध जारी रखेंगे।

भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं के बयानों में मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में जवाबदेही की मांग सामने आई।

रिपोर्ट के बाद तेज हुआ चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद

मौजूदा राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का उल्लेख किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी प्रणालियों से संबंधित फैसलों को लेकर 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां उठाई थीं।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई। विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने इस रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस व्याख्या को खारिज किया कि रिपोर्ट में बताई गई आपत्तियां अंतिम निर्णयों पर संस्थागत असहमति को दर्शाती थीं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग के मुताबिक, मसौदा तैयार करने के चरण में परिचालन से जुड़े सवाल, सुझाव और इनपुट सामने आना उसकी सामान्य प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग ने कहा कि ऐसे सवालों और सुझावों को अंतिम निर्णय पर संस्थागत असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभ्यास के कार्यक्रम से संबंधित फैसलों को लेकर भी चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है। आयोग का कहना है कि SIR कार्यक्रम से जुड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

इस तरह चुनाव आयोग ने अपने भीतर अंतिम निर्णयों को लेकर असहमति होने के दावों को खारिज किया है।

प्रदर्शन और हिरासत के बाद राजनीतिक टकराव तेज

दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को एक बार फिर तेज कर दिया है। एक ओर भारतीय युवा कांग्रेस और उसके नेता ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और केंद्र सरकार पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने फैसलों की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि SIR से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

रविवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस सूत्रों द्वारा करीब 15 पुलिसकर्मियों के घायल होने और लगभग 110 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी ने कानून-व्यवस्था का एक नया पहलू भी इस विवाद से जोड़ दिया है। कुछ महिला पुलिसकर्मियों को काटने से चोट लगने का दावा भी पुलिस सूत्रों की ओर से किया गया है।

फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग जारी है। वहीं चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को अपनी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। दिल्ली में हुए प्रदर्शन और उसके बाद सामने आए हिरासत तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।

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