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Pradhama Drishtiya Kuttakkar Review: मलयालम सिनेमा एक बार फिर एक ऐसी क्राइम थ्रिलर लेकर आया है, जिसमें कहानी, सस्पेंस और पुलिस जांच का शानदार मेल देखने को मिलता है। शाहद नीलांबुर के निर्देशन में बनी Pradhama Drishtiya Kuttakkar में पार्वती थिरुवोथु और विजयराघवन मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी पुलिसकर्मियों के एक ऐसे समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अचानक हुई एक घटना के बाद खुद को बचाने के लिए सच्चाई छिपाने की कोशिश करता है।
फिल्म की कहानी और कुछ ट्विस्ट दर्शकों को Drishyam की याद जरूर दिला सकते हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि फिल्म उसी पुराने फॉर्मूले को अपने अलग अंदाज में पेश करती है। यहां अपराध को छिपाने वाले लोग आम नागरिक नहीं, बल्कि खुद पुलिसकर्मी हैं।
क्या है Pradhama Drishtiya Kuttakkar की कहानी?
फिल्म की कहानी अलीना नाम की एक महिला पुलिसकर्मी से शुरू होती है, जिसका किरदार पार्वती थिरुवोथु ने निभाया है। पति की ड्यूटी के दौरान मौत के बाद अलीना पुलिस विभाग में नौकरी ज्वाइन करती है।
वह एक पुलिस स्टेशन में कॉन्स्टेबल के तौर पर काम शुरू करती है, जहां उसके साथ कई अलग-अलग स्वभाव के पुलिसकर्मी मौजूद हैं। इनमें दिव्या, श्रीनाथ, दासन, जेवियर और SHO प्रताप मोहन जैसे किरदार शामिल हैं।
एक रात ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी नशे में गाड़ी चलाने वाले एक व्यक्ति को पकड़ते हैं। इसके बाद घटनाएं तेजी से बदलती हैं और एक ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
अपनी मुश्किल स्थिति से निकलने के लिए पुलिसकर्मी एक अपराध को छिपाने का फैसला करते हैं। लेकिन अलीना इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आती है।
अलीना की समझदारी बनती है फिल्म की जान
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत अलीना का किरदार है। वह सिर्फ परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया नहीं देती, बल्कि हर संभावित खतरे के बारे में पहले से सोचती है।
अलीना को अपराध और पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी किताबों और जांच के मामलों से मिलती है। खास बात यह है कि वह जिस अधिकारी की लिखी किताबों से प्रेरणा लेती है, बाद में वही अधिकारी उसके सामने जांच अधिकारी बनकर खड़ा हो जाता है।
यहीं से फिल्म का असली cat-and-mouse game शुरू होता है।
पार्वती थिरुवोथु ने जीता दिल
Parvathy Thiruvothu फिल्म में पूरी तरह अपने किरदार पर हावी दिखाई देती हैं। अलीना के चेहरे के भाव, उसकी चुप्पी और मुश्किल परिस्थितियों में तेजी से लिए गए फैसले फिल्म को मजबूती देते हैं।
किरदार में एक तरफ सामान्य पुलिसकर्मी की छवि है, वहीं दूसरी तरफ परिस्थितियों के बीच असाधारण तरीके से सोचने वाली महिला भी है।
फिल्म के कई अहम दृश्यों में पार्वती का अभिनय कहानी को आगे बढ़ाता है और दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।
विजयराघवन के साथ शानदार टक्कर
फिल्म में विजयराघवन ने क्राइम ब्रांच अधिकारी हैरिस मीरान की भूमिका निभाई है।
हैरिस एक अनुभवी और तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी है। जब वह मामले की जांच शुरू करता है और अलीना के पुलिस स्टेशन तक पहुंचता है, तब फिल्म का तनाव काफी बढ़ जाता है।
अलीना की स्वाभाविक समझ और हैरिस के वर्षों के पुलिस अनुभव के बीच मुकाबला फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि अलीना ने जिस अधिकारी की लिखी किताबों से जांच के तरीके सीखे हैं, उसी अधिकारी को बाद में अपनी सच्चाई से दूर रखने की कोशिश करनी पड़ती है।
Second Half में बढ़ता है Suspense
फिल्म का दूसरा भाग खास तौर पर मजबूत है। कई छोटे-छोटे संकेत बाद में बड़ी घटनाओं से जुड़ते दिखाई देते हैं।
CCTV फुटेज, सबूतों से जुड़े कुछ सामान, अलीना के परिवार से जुड़े स्थान और अचानक होने वाली पुलिस कार्रवाई जैसे तत्व कहानी में लगातार नए सवाल पैदा करते हैं।
फिल्म दर्शकों को हर समय यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर पुलिसकर्मी अपनी बनाई हुई कहानी को कितनी देर तक बचा पाएंगे।
क्या फिल्म Drishyam जैसी है?
Pradhama Drishtiya Kuttakkar की तुलना Drishyam से होना स्वाभाविक है क्योंकि दोनों फिल्मों में अपराध के बाद उसे छिपाने की कोशिश और जांच से बचने की रणनीति देखने को मिलती है।
लेकिन दोनों फिल्मों में एक बड़ा अंतर है।
Drishyam में एक आम आदमी अपने परिवार को बचाने के लिए पुलिस जांच से मुकाबला करता है, जबकि यहां कहानी में शामिल लोग खुद पुलिस विभाग से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें अपराध स्थल और जांच प्रक्रिया की बेहतर जानकारी हासिल है।
यही अंतर फिल्म को अपनी अलग पहचान देता है।
फिल्म की कुछ कमियां
फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कुछ हिस्सों को थोड़ा छोटा किया जा सकता था, जिससे इसकी pacing और बेहतर हो सकती थी।
कुछ scenes ऐसे हैं जहां कहानी का point पहले ही स्पष्ट हो जाता है, लेकिन sequence कुछ देर और चलता रहता है। इससे फिल्म की overall length थोड़ी ज्यादा महसूस हो सकती है।
इसके अलावा फिल्म में मुख्य किरदारों के भीतर चल रहे अपराधबोध को ज्यादा गहराई से नहीं दिखाया गया है। हालांकि दिव्या के किरदार के जरिए इस पहलू को कुछ हद तक सामने लाया गया है।
Supporting Cast भी मजबूत
पार्वती और विजयराघवन के अलावा Sidharth Bharathan, Mathew Thomas, Unnimaya Prasad, Vinay Forrt और Azeez Nedumangad ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
विनय फोर्ट का किरदार कहानी में हल्का-फुल्का हास्य लेकर आता है। वहीं बाकी कलाकारों की मौजूदगी पुलिस स्टेशन और अपराध की कहानी को विश्वसनीय बनाने में मदद करती है।
Music और Background Score
Mujeeb Majeed का background score फिल्म के तनाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। खासकर महत्वपूर्ण suspense sequences में संगीत कहानी की intensity को और बढ़ाता है।
बारिश के बीच होने वाला climax फिल्म के सबसे प्रभावशाली हिस्सों में से एक बनकर सामने आता है।
Pradhama Drishtiya Kuttakkar Verdict
कुल मिलाकर Pradhama Drishtiya Kuttakkar एक स्मार्ट और gripping Malayalam crime thriller है। फिल्म भले ही कुछ जगहों पर Drishyam की याद दिलाती हो, लेकिन इसकी कहानी और characters इसे अपनी अलग पहचान देने में सफल रहते हैं।
पार्वती थिरुवोथु और विजयराघवन की टक्कर फिल्म की सबसे बड़ी highlights में से एक है। खासकर दूसरा भाग और दोनों किरदारों के बीच चलने वाला psychological mind game दर्शकों को बांधे रखता है।
अगर आपको crime investigation, police procedural, suspense और unpredictable twists वाली फिल्में पसंद हैं, तो Pradhama Drishtiya Kuttakkar आपके लिए एक अच्छी choice हो सकती है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ / 5
Genre: Crime Thriller / Police Procedural
मुख्य कलाकार: Parvathy Thiruvothu, Vijayaraghavan, Sidharth Bharathan, Mathew Thomas, Unnimaya Prasad, Vinay Forrt
निर्देशक: Shahad Nilambur #PradhamaDrishtiyaKuttakkar
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