12 सितंबर 2026 | फिल्म डेस्क
प्रियदर्शन की नई फिल्म ‘Haiwaan’, मलयालम फिल्म Oppam का हिंदी रीमेक है। फिल्म की कहानी एक नेत्रहीन व्यक्ति के इर्द-गिर्द बुनी गई है, लेकिन करीब ढाई घंटे से ज्यादा की यह फिल्म अपनी कहानी और स्क्रीनप्ले के स्तर पर दर्शकों को बांधने में नाकाम रहती है।
फिल्म को लेकर सबसे बड़ी समस्या इसका अतार्किक प्लॉट और बिखरा हुआ कहानी कहने का अंदाज है। कई घटनाएं ऐसी हैं जिनका फिल्म की कहानी से मजबूत संबंध नजर नहीं आता। नतीजा यह कि रोमांच पैदा करने के बजाय फिल्म कई जगह हास्यास्पद लगने लगती है।
Saif Ali Khan की भूमिका पर उठे सवाल
सैफ अली खान फिल्म में श्याम राणे नाम के महाराष्ट्रीयन किरदार में नजर आते हैं। हालांकि उनकी प्रस्तुति किरदार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से मेल नहीं खाती। श्याम एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो परिवार की आर्थिक परेशानियों और बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने की चिंता में है, लेकिन उसका बेहद स्टाइलिश पहनावा और महंगे एक्सेसरीज इस संघर्ष से मेल नहीं खाते।
फिल्म में उनका किरदार कई ऐसी असाधारण क्षमताएं दिखाता है, जो कहानी को विश्वसनीय बनाने के बजाय और अधिक अवास्तविक बना देती हैं।
Akshay Kumar का विलेन अंदाज भी नहीं जमा
अक्षय कुमार परशुराम के किरदार में खलनायक की भूमिका निभाते हैं। किरदार को बेहद खतरनाक बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन उनका अभिनय कई जगह इतना ज्यादा ओवर-द-टॉप हो जाता है कि गंभीर विलेन के बजाय वह पैरोडी जैसा महसूस होने लगता है।
कहानी के मुताबिक परशुराम अपने परिवार को खोने के बाद मानसिक रूप से टूट चुका है और उन लोगों को निशाना बनाता है जिन्हें वह अपने परिवार की मौत के लिए जिम्मेदार मानता है।
160 मिनट तक कहानी में खास विकास नहीं
फिल्म की लगभग 164 मिनट की लंबाई भी इसकी बड़ी कमजोरी बन जाती है। समीक्षा के मुताबिक फिल्म का बड़ा हिस्सा बिना किसी ठोस कहानीगत विकास के गुजरता है। मुंबई की लोकेशन, पहाड़ों और खूबसूरत दृश्यों पर काफी जोर दिया गया है, लेकिन ये दृश्य कमजोर स्क्रीनप्ले की भरपाई नहीं कर पाते।
फिल्म में एक हाई-प्रोफाइल रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स भी दिखाया गया है, लेकिन वहां CCTV जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का न होना कहानी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
‘Haiwaan’ देखना क्यों बन जाता है मुश्किल?
फिल्म का सबसे बड़ा संकट यह है कि जिस कहानी में सस्पेंस और थ्रिल पैदा करने की क्षमता हो सकती थी, वह लगातार अतार्किक घटनाओं और कमजोर लेखन के कारण अपना असर खो देती है।














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