रटौल। रटौल नगर पंचायत की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नगर पंचायत अध्यक्ष पद से हटाए गए जुनैद फरीदी ने सोमवार को दोबारा चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल ली। हाईकोर्ट द्वारा सात अगस्त को उनके खिलाफ पूर्व में जारी किए गए सभी आदेशों को निरस्त किए जाने के बाद जुनैद फरीदी अपने समर्थकों के साथ नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने चेयरमैन की कुर्सी पर बैठकर दोबारा कार्यभार संभालने का ऐलान किया। इस दौरान नगर पंचायत कार्यालय परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल भी तैनात रहा।
जुनैद फरीदी के नगर पंचायत कार्यालय पहुंचने पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थकों की मौजूदगी में उन्होंने कार्यालय में प्रवेश किया और चेयरमैन की कुर्सी पर बैठ गए। उनके दोबारा कार्यभार संभालने से रटौल की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
2023 के चुनाव में 540 वोटों से मिली थी जीत
रटौल नगर पंचायत के चेयरमैन पद के लिए मई 2023 में चुनाव हुआ था। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी जुनैद फरीदी ने जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी हाजी मुंतजिर को 540 वोटों से हराया था।
चुनाव परिणाम आने के बाद जुनैद फरीदी ने चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली और नगर पंचायत के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद ही उनके नामांकन और शपथपत्र को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया था।
भाजपा प्रत्याशी हाजी मुंतजिर की ओर से न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि जुनैद फरीदी ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए शपथपत्र में अपने आपराधिक इतिहास, करोड़ों रुपये की संपत्ति और बैंकों से लिए गए कर्ज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं। इसी मामले को लेकर लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया चलती रही।
मार्च 2026 में चेयरमैन पद से हटाने का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश पवन कुमार राय ने सात मार्च 2026 को जुनैद फरीदी के नामांकन पत्र और शपथपत्र को शून्य घोषित करने का आदेश दिया।
न्यायालय के इस आदेश के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने 14 मार्च को चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी हाजी मुंतजिर को चेयरमैन बनाने के आदेश जारी किए। इसके बाद 16 मार्च को खेकड़ा के तत्कालीन एसडीएम की मौजूदगी में हाजी मुंतजिर को चेयरमैन पद की शपथ दिलाई गई।
इस घटनाक्रम के बाद रटौल नगर पंचायत की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया था। एक ओर जुनैद फरीदी अपने चुनावी जीत के आधार पर पद पर बने रहने का दावा कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर न्यायालय के आदेश के आधार पर हाजी मुंतजिर ने चेयरमैन पद संभाल लिया था।
हाईकोर्ट से जुनैद फरीदी को मिली राहत
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ जुनैद फरीदी ने हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपने खिलाफ जारी किए गए आदेशों को चुनौती दी और चेयरमैन पद से हटाने की कार्रवाई को गलत बताया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सात अगस्त को पूर्व में जारी किए गए आदेशों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही हाजी मुंतजिर को चेयरमैन पद की शपथ दिलाने की कार्रवाई को भी अवैध करार दिया गया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुनैद फरीदी के लिए दोबारा चेयरमैन पद संभालने का रास्ता साफ हुआ। इसी आदेश के आधार पर वह सोमवार को अपने समर्थकों के साथ नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे।
ढोल-नगाड़ों के साथ कार्यालय पहुंचे समर्थक
सोमवार को जुनैद फरीदी के नगर पंचायत कार्यालय पहुंचने के दौरान समर्थकों की भीड़ जुटी रही। समर्थक ढोल-नगाड़े लेकर पहुंचे और उनके समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद जुनैद फरीदी ने नगर पंचायत कार्यालय में प्रवेश किया और चेयरमैन की कुर्सी पर बैठकर दोबारा अपनी जिम्मेदारी संभाली।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी नगर पंचायत कार्यालय के आसपास तैनात रहा। प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती गई।
जुनैद फरीदी ने इस मौके पर कहा कि उन्होंने पहले भी रटौल कस्बे के विकास के लिए ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम किया है। आगे भी वह नगर पंचायत के विकास और कस्बे के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद वह दोबारा जनता की सेवा के लिए चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके मुताबिक नगर पंचायत में विकास कार्यों को गति देना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
एसडीएम और ईओ कार्यालय नहीं पहुंचीं
जुनैद फरीदी के दोबारा कार्यभार संभालने के दौरान खेकड़ा एसडीएम सुरभि शर्मा और रटौल नगर पंचायत की ईओ आस्था पाठक कार्यालय में मौजूद नहीं थीं। अधिकारियों की गैरमौजूदगी में ही जुनैद फरीदी अपने समर्थकों के साथ नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और चेयरमैन की कुर्सी पर बैठ गए।
अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशासन के सामने अब हाईकोर्ट के आदेश और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न परिस्थितियों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।
प्रशासन के सामने बनी असमंजस की स्थिति
रटौल नगर पंचायत में चेयरमैन पद को लेकर पूरा मामला अब एक बार फिर चर्चा में है। एक तरफ जुनैद फरीदी हाईकोर्ट का आदेश लेकर दोबारा पद संभालने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व में चेयरमैन बनाए गए हाजी मुंतजिर के समर्थन में भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि और समर्थक खड़े हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुनैद फरीदी का दोबारा चेयरमैन की कुर्सी पर बैठना स्थानीय प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अधिकारियों की गैरमौजूदगी में उनके द्वारा स्वयं कार्यभार संभालने के बाद अब आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
नगर पंचायत के कामकाज पर भी इस घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद के कारण चेयरमैन पद को लेकर बनी स्थिति ने नगर पंचायत की राजनीति को लगातार प्रभावित किया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुनैद फरीदी के दोबारा जिम्मेदारी संभालने से यह विवाद किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
विकास कार्यों पर रहेगी नजर
जुनैद फरीदी ने दोबारा चेयरमैन की कुर्सी संभालने के बाद विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बताया है। ऐसे में रटौल नगर पंचायत क्षेत्र में सड़क, सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को लेकर भी लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि चेयरमैन पद को लेकर चले लंबे कानूनी विवाद के बाद नगर पंचायत का कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है। प्रशासनिक अधिकारियों और नगर पंचायत अध्यक्ष के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल सोमवार को जुनैद फरीदी के दोबारा चेयरमैन की कुर्सी संभालने के साथ रटौल नगर पंचायत की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुए इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को फिर से बदल दिया है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।















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