10 सितंबर 2026 | नई दिल्ली
1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
अबू सलेम की ओर से दलील दी गई थी कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से दिए गए 25 साल से अधिक जेल में न रखने के आश्वासन के तहत उसकी रिहाई होनी चाहिए। उसके वकील ने यह भी तर्क दिया कि विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बिताई गई अवधि और अच्छे आचरण के आधार पर मिली रिमिशन को 25 साल की अवधि में शामिल किया जाना चाहिए।
नवंबर 2030 में पूरी होगी 25 साल की अवधि
अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 25 साल की अवधि की गणना 11 नवंबर 2005 से की जाती है, जब अबू सलेम को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। इस हिसाब से 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल नियमों के तहत अर्जित रिमिशन का इस्तेमाल प्रत्यर्पण समझौते के तहत तय 25 साल की अवधि को और कम करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अबू सलेम को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। भारत ने पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण के समय आश्वासन दिया था कि उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और 25 साल से अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जाएगा।
अबू सलेम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है।














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