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सिक्किम सुरंग हादसे में हुई मौतों पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों से मांगी रिपोर्ट

कोलकाता, 10 अगस्त : राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सिक्किम में बन रही एक पनबिजली सुरंग के अंदर मीथेन गैस के रिसाव से 20 मजदूरों की मौत के मामले में प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों और सिक्किम के नामची जिला प्रशासन को घटना से जुड़े हालात के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है।
एनजीटी की प्रधान पीठ ने इस मामले को कोलकाता स्थित अपनी पूर्वी क्षेत्रीय पीठ को भी स्थानांतरित कर दिया है, जो तीन सितंबर को इस मामले की सुनवाई करेगी।
यह कार्यवाही नामची जिले के समरडुंग में राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) की तीस्ता-6 पनबिजली परियोजना की ‘हेड रेस टनल’ में 20 जुलाई को हुई घटना से संबंधित है। न्यायाधिकरण के तीन अगस्त के आदेश के अनुसार सुरंग के अंदर चट्टानों से अचानक मीथेन गैस का रिसाव हुआ, जिससे घना धुआं और जहरीली गैसें फैल गईं। इस घटना में कम से कम 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि सुरंग के अंदर फंसे अन्य लोगों को बचाने के लिए बचाव अभियान चलाया गया।
न्यायाधिकरण ने घटना पर एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लिया और नामची के जिला कलेक्टर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), सिक्किम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ,कोलकाता में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कहा कि इस घटना से पर्यावरण संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं, जिनमें वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई और पर्यावरण तथा वायु प्रदूषण कानूनों का संभावित उल्लंघन शामिल है।
इसने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले पूर्वी क्षेत्रीय पीठ को अपना जवाब सौंपें। न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि कोई प्रतिवादी वकील के माध्यम से जवाब दाखिल करने की बजाय सीधे जवाब दाखिल करता है, तो उसे न्यायाधिकरण की सहायता के लिए ऑनलाइन उपस्थित रहना होगा। न्यायाधिकरण ने कहा कि स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करने की उसकी शक्ति को उच्चतम न्यायालय ने ‘बृहन्मुंबई नगर निगम बनाम अंकिता सिन्हा और अन्य’ मामले में 2021 के अपने फैसले में मान्यता दी थी।

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