5 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में Artists-in-Residence Programme के तहत रह रहे पारंपरिक एवं लोक कलाकारों से मुलाकात की। इस अवसर पर विभिन्न भारतीय कला परंपराओं से जुड़े कलाकारों ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के सपने को रंगों में उकेरा।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस मुलाकात में भारतीय लोक एवं पारंपरिक कला की विविधता देखने को मिली। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं से जुड़ी कला शैलियों के कलाकार इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और देश के विकास के सपने को अभिव्यक्त किया।

इस बार Artists-in-Residence Programme के तहत कलाकारों की रचनाओं में ‘विकसित भारत’ की कल्पना प्रमुख रूप से दिखाई दी। कलाकारों ने रंगों और पारंपरिक कला तकनीकों के माध्यम से इस विचार को अपनी रचनात्मक दृष्टि में प्रस्तुत किया। यह पहल पारंपरिक एवं लोक कला को समकालीन विचारों से जोड़ने का माध्यम भी बनी है।

मधुबनी से चेरियाल तक दिखी भारतीय कला की विविधता

राष्ट्रपति भवन में इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न भारतीय कला शैलियों से जुड़े कलाकार मौजूद रहे। इनमें मधुबनी, गोंड, पत्तचित्र, फड़, केरल म्यूरल और चेरियाल जैसी पारंपरिक एवं लोक कला शैलियां शामिल हैं।

इन सभी कला शैलियों की अपनी अलग पहचान और कलात्मक अभिव्यक्ति है। कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक शैली में ‘विकसित भारत’ की कल्पना को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस तरह अलग-अलग कला परंपराओं के माध्यम से एक ही विचार को विविध रंगों और शैलियों में सामने रखा गया।

मधुबनी, गोंड, पत्तचित्र, फड़, केरल म्यूरल और चेरियाल जैसी कला शैलियों का एक साथ दिखाई देना भारतीय कला की विविधता को रेखांकित करता है। कलाकारों ने पारंपरिक कला की अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए ‘विकसित भारत’ के विचार को अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाया।

‘विकसित भारत’ को कला के माध्यम से अभिव्यक्ति

इस कार्यक्रम में ‘विकसित भारत’ केवल एक विचार के रूप में नहीं, बल्कि कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में भी सामने आया। कलाकारों ने अपने चित्रों और पारंपरिक कला शैलियों के जरिए इस सपने को रंगों में उकेरा।

कला के माध्यम से किसी विचार को प्रस्तुत करने की अपनी अलग विशेषता होती है। कलाकार अपनी कल्पना, रंगों और शैली के जरिए किसी विषय को दृश्य रूप देते हैं। Artists-in-Residence Programme के तहत इस बार पारंपरिक एवं लोक कलाकारों ने इसी माध्यम से ‘विकसित भारत’ की कल्पना को प्रस्तुत किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की कलाकारों से मुलाकात इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। राष्ट्रपति भवन में कलाकारों के साथ यह संवाद भारतीय पारंपरिक और लोक कला की विविध अभिव्यक्तियों को सामने लाने वाला अवसर रहा।

भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की झलक

कार्यक्रम में शामिल कला शैलियां भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हुई हैं। मधुबनी से लेकर गोंड और पत्तचित्र से लेकर फड़ तक, प्रत्येक शैली कलाकारों को अपनी विशिष्ट कलात्मक भाषा में विचार व्यक्त करने का अवसर देती है। वहीं केरल म्यूरल और चेरियाल जैसी शैलियां भी इस विविधता का हिस्सा हैं।

इस कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक एवं लोक कलाकारों को अपनी कला को एक व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कलाकारों ने अपनी कला के जरिए भारतीय संस्कृति की विविधता के साथ-साथ ‘विकसित भारत’ की कल्पना को भी सामने रखा।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह मुलाकात इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय रही कि इसमें अलग-अलग भारतीय कला परंपराओं से जुड़े कलाकार एक साथ दिखाई दिए। उनकी रचनाओं में पारंपरिक कला और वर्तमान राष्ट्रीय आकांक्षा का मेल नजर आया।

कला, परंपरा और भविष्य की कल्पना

‘विकसित भारत’ के सपने को पारंपरिक कला के माध्यम से प्रस्तुत करना कलाकारों की रचनात्मक दृष्टि को दर्शाता है। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक शैलियों का इस्तेमाल करते हुए विकास की कल्पना को रंगों और चित्रों में व्यक्त किया।

इस तरह Artists-in-Residence Programme में भारतीय कला की विरासत और भविष्य की कल्पना को एक साथ देखने का अवसर मिला। पारंपरिक एवं लोक कलाकारों की रचनाओं ने यह दिखाया कि अलग-अलग कला शैलियां अपने विशिष्ट रूप में किसी साझा विचार को अभिव्यक्त कर सकती हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में इन कलाकारों से मुलाकात की और कार्यक्रम के तहत उनकी रचनात्मक गतिविधियों को करीब से देखा। मधुबनी, गोंड, पत्तचित्र, फड़, केरल म्यूरल और चेरियाल जैसी कला शैलियों के कलाकारों ने इस बार ‘विकसित भारत’ को अपने रंगों और कला के माध्यम से अभिव्यक्ति दी।

भारतीय लोक एवं पारंपरिक कला की यह विविधता देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Artists-in-Residence Programme के माध्यम से इन कला शैलियों और कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को एक साझा मंच मिला, जहां परंपरा और ‘विकसित भारत’ की कल्पना एक साथ दिखाई दी।

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