6 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली: ऐप आधारित कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी और अन्य ऑनलाइन परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने नई सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है। इन दिशानिर्देशों में ड्राइवर और वाहन के सत्यापन से लेकर रूट में अचानक बदलाव, उत्पीड़न, असुरक्षित स्थान पर ड्रॉप किए जाने और आपात स्थिति में मदद मिलने में देरी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

NCW ने राज्यों से पुलिस, परिवहन अधिकारियों और ऐप आधारित परिवहन कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि महिलाओं की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। आयोग का जोर इस बात पर है कि ऑनलाइन परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल करते समय महिलाओं को सुरक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या का सामना होने पर तत्काल सहायता मिल सके।

ड्राइवर और वाहन की जांच पर जोर

नई गाइडलाइन के तहत ऐप आधारित परिवहन कंपनियों से ड्राइवरों और वाहनों का उचित सत्यापन करने को कहा गया है। इसके साथ ही ड्राइवरों की पृष्ठभूमि की जांच और पुलिस वेरिफिकेशन की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।

NCW ने ड्राइवरों को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में नियमित प्रशिक्षण देने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवर यात्रियों के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार करें तथा किसी भी आपात स्थिति में उचित प्रक्रिया का पालन किया जा सके।

गाइडलाइन में महिलाओं को एक महत्वपूर्ण सुविधा देने की भी सिफारिश की गई है। यदि ऐप पर दिखाई जा रही जानकारी और वास्तविक ड्राइवर या वाहन की जानकारी में अंतर हो, तो महिला यात्री को बिना किसी पेनल्टी के राइड रद्द करने की अनुमति होनी चाहिए।

देर रात यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था

NCW ने देर रात होने वाली यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई है। इसके लिए ड्राइवर वेरिफिकेशन को मजबूत करने, यात्रा की जानकारी भरोसेमंद संपर्कों के साथ साझा करने और सुरक्षित स्थान पर ड्रॉप की सुविधा उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।

गाइडलाइन के अनुसार, ऐप आधारित कंपनियों को 24 घंटे आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करना चाहिए। महिलाओं को जरूरत पड़ने पर आसानी से SOS बटन उपलब्ध होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में सहायता के लिए संपर्क किया जा सके।

इसके अलावा, यदि कोई ड्राइवर निर्धारित मार्ग से असामान्य तरीके से हटता है या लंबे समय तक एक ही स्थान पर रुका रहता है, तो ऐप के माध्यम से कंपनी और यात्री दोनों को अलर्ट भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे किसी संभावित सुरक्षा समस्या का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

सुरक्षित ड्रॉप-ऑफ और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई

महिला आयोग ने सुरक्षित ड्रॉप-ऑफ को भी अपनी गाइडलाइन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। महिलाओं को ऐसी जगह पर उतारने से बचने की व्यवस्था होनी चाहिए, जहां उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

वरिष्ठ महिलाओं के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही महिलाओं से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और यात्रा से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जांच में इन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सके।

NCW ने स्पष्ट किया है कि जिन शिकायतों में पुलिस की कार्रवाई आवश्यक है, उन्हें बिना देरी के पुलिस को भेजा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य शिकायत और जांच की प्रक्रिया के बीच अनावश्यक देरी को कम करना है।

NCW अध्यक्ष ने महिलाओं की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

NCW की अध्यक्ष विजया राहतकर ने कहा कि महिलाओं को बिना डर के यात्रा करने में सक्षम होना चाहिए और ऐप आधारित परिवहन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।

उनका बयान ऐसे समय में आया है जब कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी और अन्य ऐप आधारित परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल दैनिक आवागमन के लिए किया जाता है। आयोग की नई गाइडलाइन में यात्रा शुरू होने से लेकर सुरक्षित ड्रॉप-ऑफ और शिकायत के निस्तारण तक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली CM ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

इससे पहले सोमवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोक नायक अस्पताल स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। यह पहल महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े मामलों पर केंद्रित थी।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने सखी वन स्टॉप सेंटर की सुविधाओं और शिकायत प्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने जरूरत के समय केंद्र पर आने वाली महिलाओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मामलों की स्थिति, पुलिस रिपोर्ट और FIR, केंद्र की ओर से पीड़ितों को दी गई सहायता तथा आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी वाली पूरी मासिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाए।

POCSO मामलों में गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश

रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को बालिकाओं से जुड़े POCSO मामलों में गोपनीयता बनाए रखने और FIR, गिरफ्तारियों तथा अदालत में चल रही कार्यवाही की स्थिति की नियमित निगरानी करने का भी निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि सभी मामलों से जुड़ी जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जाना चाहिए और समय पर उसका फॉलोअप किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर मामले की प्रक्रिया प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया में यदि अधिकारियों को किसी तरह की कठिनाई आती है, तो इसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी जाए। इसका उद्देश्य सामने आने वाली समस्याओं का जल्द समाधान करना और मामलों की कार्रवाई को प्रभावित होने से रोकना है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े दोनों स्तरों पर दिए गए निर्देशों में शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा पीड़ित महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

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