11 सितंबर 2026 | नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल उस समय सुर्खियों में आए थे, जब राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। उनकी शख्सियत और ड्यूटी के प्रति समर्पण ने लोगों का ध्यान खींचा। लेकिन करीब 12 साल तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद महज 30 साल की उम्र में उनके समय से पहले रिटायरमेंट के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए।
अब मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने एक पॉडकास्ट में पहली बार अपने इस फैसले के पीछे की निजी वजहों पर खुलकर बात की है।
सेना छोड़ना नहीं था सपना, परिवार बना वजह
मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सेना इसलिए नहीं छोड़ी क्योंकि वह अपने करियर या सैन्य जीवन से असंतुष्ट थे। उनके लिए भारतीय सेना की वर्दी पहनना केवल नौकरी नहीं, बल्कि बचपन का सपना था।
उन्होंने बताया कि सेना में बिताए 12 साल उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी यूनिफॉर्म उतारनी पड़ेगी।
हालांकि, एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपनी सैन्य जिम्मेदारियों और परिवार के बीच कठिन फैसला लेना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लेने का फैसला किया।
राष्ट्रपति के ADC रहते क्या था सबसे बड़ा त्याग?
राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी बेहद प्रतिष्ठित होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी होती है। इस भूमिका में अधिकारी को राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, यात्राओं और विभिन्न संवैधानिक आयोजनों के दौरान लगातार ड्यूटी पर रहना पड़ता है।
ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ADC के रूप में जिम्मेदारी निभाते समय निजी जिंदगी और परिवार के लिए समय निकालना आसान नहीं था। कई बार व्यक्तिगत इच्छाओं और पारिवारिक जीवन से समझौता करना पड़ता था।
यही जिम्मेदारियां बाद में उनके फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनीं।
30 साल की उम्र में क्यों लिया रिटायरमेंट?
मेजर ऋषभ के मुताबिक, सेना छोड़ने का फैसला अचानक नहीं था। उन्होंने इस बारे में काफी समय तक विचार किया। उनके सामने सवाल था कि वह अपने सैन्य करियर को जारी रखें या उस समय परिवार के साथ खड़े हों, जब उनकी जरूरत ज्यादा थी।
आखिरकार उन्होंने परिवार को प्राथमिकता दी।
उनका फैसला इस मायने में भी खास है कि उन्होंने उस समय सेना छोड़ी, जब वह अपने करियर के एक महत्वपूर्ण दौर में थे। उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि सेना उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं बल्कि जीवन का सपना थी।
राष्ट्रपति मुर्मू के साथ जुड़ी यादें भी रहीं खास
ADC के रूप में मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ कई आधिकारिक कार्यक्रमों में नजर आए। इस दौरान उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने।
उनकी ड्यूटी के दौरान राष्ट्रपति के प्रति उनका अनुशासन, सतर्कता और समर्पण लोगों को काफी पसंद आया। इसी वजह से वह सेना से बाहर भी सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुए।
‘यह असंतुष्टि का फैसला नहीं था’
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की बातों से यह स्पष्ट होता है कि सेना से उनकी विदाई किसी नाराजगी या असंतुष्टि की वजह से नहीं हुई।
उन्होंने जिस वर्दी को अपने सपने की तरह जिया, उसे छोड़ना उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन फैसला था। लेकिन जब परिवार और देश सेवा के बीच चुनाव की स्थिति बनी, तो उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी।
उनकी कहानी बताती है कि वर्दी पहनकर देश की सेवा करना जितना बड़ा सम्मान है, उतना ही कठिन कभी-कभी उस वर्दी को छोड़ने का फैसला भी हो सकता है।
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