लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश और जापान ने खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की। जापान-भारत बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यामानाशी प्रीफेक्चर के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि उत्पादों को आधुनिक तकनीक और प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के जरिए वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।
‘फ्रॉम फार्म गेट टू ग्लोबल प्लेट : अनलॉकिंग यूपी’ज फूड प्रोसेसिंग रिवॉल्यूशन’ विषयक सत्र में सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के विशाल कृषि आधार को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण, जापानी तकनीक, मजबूत सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विशेष संबोधन दिया, जबकि भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने मुख्य वक्तव्य दिया। सत्र में किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो, गोल्डी ग्रुप के निदेशक सुदीप गोयनका और अमूल (बनास डेयरी) के यूपी ऑपरेशंस प्रमुख दिनेश कुमार चौधरी ने भी हिस्सा लिया।
यूपी के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन, मेहनतकश किसान और युवा कार्यबल प्रदेश को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र बनाने की क्षमता प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि जापान की उन्नत तकनीक, गुणवत्ता मानक और विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में निवेश-अनुकूल नीतियों, प्रोत्साहनों और आधुनिक लॉजिस्टिक्स का मजबूत तंत्र विकसित किया गया है। उन्होंने जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश और नवाचार के लिए आमंत्रित किया।
जापानी कंपनियों के लिए यूपी में अवसर
जापान के राजदूत ओनो केइची ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि शक्ति, औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने तकनीक, निवेश और कौशल विकास को स्थानीय अवसरों से जोड़कर दीर्घकालिक और व्यावहारिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया।
किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भारत के प्रति जापान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि जापानी कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पाद विकसित करने होंगे।
उन्होंने भारत में जापानी और पैन-एशियाई व्यंजनों की बढ़ती स्वीकार्यता तथा बी2बी से बी2सी बाजार में विस्तार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात में सहयोग की संभावनाएं
कोसाटो ने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पड़ोसी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए संभावित निर्यात केंद्र बन सकता है।
सत्र में खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीयकरण, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार तक पहुंच को जापान-उत्तर प्रदेश सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।
प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के सहयोग से प्रदेश की कृषि शक्ति को उच्च मूल्य वाले उत्पादों, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य कारोबार में बदलने के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही जापानी निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।














Leave a Reply