नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026। नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से लगे इलाकों से लेकर पूर्वी नेपाल तक कई स्थानों पर हालात गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
नेपाल में आई इस आपदा का असर सीमा पार भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश तक दिखाई दे रहा है। गंडक और कोसी नदी प्रणालियों में बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है।
रसुवा से पूर्वी नेपाल तक भारी तबाही
तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने ल्हेंदे खोला और भोटे कोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली में जलप्रवाह को बेहद तेज कर दिया। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा समेत कई इलाकों में बाढ़ और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक भोटे कोशी-त्रिशूली बेसिन में 157 शव बरामद किए गए हैं और 403 लोग लापता बताए गए हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक, अन्य विदेशी नागरिक और नेपाली नागरिक शामिल हैं। राहत एवं बचाव अभियान में जुटे सुरक्षाकर्मियों के भी लापता होने की सूचना है।
पूर्वी नेपाल में भी लगातार बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए हैं। कोशी प्रांत के इलाम जिले में अकेले 37 लोगों की मौत भूस्खलन के कारण होने की जानकारी दी गई है, जबकि पूरे क्षेत्र में मृतकों की संख्या 49 से अधिक बताई गई है।
19 मोटर पुल बहे, 42 किलोमीटर सड़क प्रभावित
भारी बाढ़ और भूस्खलन का सबसे बड़ा असर नेपाल के सड़क नेटवर्क पर पड़ा है। कई प्रमुख राजमार्ग मलबे से बंद हो गए हैं। 19 मोटर योग्य पुलों के बहने और करीब 42 किलोमीटर बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है।
पृथ्वी हाईवे, बीपी हाईवे, अरनिको हाईवे और नारायणगढ़-मुगलिंग मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों पर भी मलबा आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। कई पर्वतीय गांवों का संपर्क राजधानी काठमांडू और जिला मुख्यालयों से टूट गया है।
354 MW बिजली उत्पादन पर असर
बाढ़ के तेज बहाव और मलबे ने नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 8 चालू जलविद्युत परियोजनाएं, कुल 354 मेगावाट क्षमता, प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा निर्माणाधीन बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है।
रसुवागढ़ी, सांजेन खोला और अपर त्रिशूली-3A जैसी परियोजनाएं प्रभावित परियोजनाओं में शामिल बताई गई हैं। इससे नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है।
कोशी नदी का भी बढ़ा जलप्रवाह
पूर्वी नेपाल में सप्तकोशी नदी का जलप्रवाह करीब 3.69 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी है। सामान्य प्रवाह करीब 1.50 लाख क्यूसेक बताया गया है। जलप्रवाह बढ़ने के बाद कोशी बैराज के सभी 56 स्लुइस गेट खोलने पड़े।
मध्य नेपाल में त्रिशूली और भोटे कोशी के उफान का असर गंडक-नारायणी बेसिन पर भी पड़ रहा है। कुलेखानी जलविद्युत परियोजना के जलाशय के भरने के बाद पानी की निकासी की गई, जिससे बागमती नदी प्रणाली पर भी असर पड़ा।
बिहार में गंडक बैराज के सभी 36 गेट खुले
नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए बिहार में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बैराज से 86 हजार क्यूसेक से अधिक पानी के निकास की जानकारी दी गई है।
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
पश्चिमी चंपारण के तटबंधीय इलाकों से 5 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की जानकारी है। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं।
यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर पर भी नजर
नेपाल से निकलने वाली नदियों का पानी बिहार के साथ उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों को भी प्रभावित कर सकता है। यूपी प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक-नारायणी नदी के जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी है।
नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
नेपाल की बाढ़ का भारत पर कितना असर?
नेपाल से आने वाला पानी सीधे भारतीय मैदानी इलाकों की नदियों में पहुंचता है। गंडक और कोसी जैसी नदियां नेपाल से भारत में प्रवेश करती हैं, इसलिए ऊपरी इलाकों में अचानक जलप्रवाह बढ़ने पर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि नेपाल से आने वाले पानी का एक हिस्सा चौड़ी भारतीय नदी प्रणालियों में फैल जाता है, लेकिन तेज बहाव और मलबे के कारण नदी किनारे बसे गांवों के लिए खतरा बना रह सकता है।
वाल्मीकिनगर गंडक बैराज को करीब 8.5 लाख क्यूसेक पानी के दबाव को झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। ऐसे में अनुमानित 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी पहुंचने की स्थिति में बैराज की संरचना को तत्काल खतरा नहीं माना जा रहा, लेकिन नदी का तेज करंट चिंता का विषय है।
नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही पर रोक
बगहा क्षेत्र में नेपाल सीमा पर एहतियात के तौर पर आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। नेपाल में फंसे बिहार के लोगों को भारत लौटने की अनुमति दी जा रही है, जबकि बिहार में फंसे नेपाली नागरिकों को नेपाल जाने दिया जा रहा है। अन्य लोगों की आवाजाही पर रोक जारी है।
आगे भी बनी हुई है खतरे की आशंका
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अचानक जलप्रवाह बढ़ने से नदियों का स्तर फिर तेजी से ऊपर जा सकता है।
ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है। नदी में नाव चलाने या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
नेपाल की पहाड़ियों से उठी जल-प्रलय की यह लहर अब भारत की नदी प्रणालियों तक पहुंच चुकी है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रशासन की निगाहें लगातार जलस्तर पर बनी हुई हैं। आने वाले घंटों में नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति ही तय करेगी कि बाढ़ का खतरा कितना बढ़ता है।
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