
महोबा, 09 अगस्त : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में महोबा जिले में स्थित 24 तीर्थंकर गुफा जैन धर्म के प्राचीन वैभव, तप, त्याग और आध्यात्मिक चेतना की अनमोल धरोहर अपेक्षित संरक्षण और देखरेख के अभाव में अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।
ग्रेनाइट की विशाल शिलाओं पर उत्कीर्ण भगवान के 24 तीर्थंकरों की दिव्य प्रतिमाएं इस बात की साक्षी हैं कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र जैन साधना, स्वाध्याय और धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।
महोबा मुख्यालय के दक्षिण पश्चिम छोर पर गोरखगिरी पर्वत की तलहटी मे स्थित जैन तीर्थकर क्षेत्र के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से संबंधित विवरणों के अनुसार यहां उत्कीर्ण प्रतिमाओं का निर्माण लगभग 1218 ईस्वी के आसपास माना जाता है। मुख्य प्रतिमा के नीचे अंकित शिलालेख और परिसर में मौजूद प्राचीन अवशेष इस स्थल के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को और बढ़ाते हैं। माना जाता है कि यहां कभी विशाल जैन मठ रहा होगा, जहां धर्म, ज्ञान और तपस्या की परंपरा निरंतर प्रवाहित होती थी।
पुरातत्व विभाग से संरक्षित जैन धर्म की यह तीर्थ स्थली अति महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर होने के बावजूद अपेक्षित संरक्षण और देखरेख के अभाव मे अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। स्थानीय स्तर पर यह चिंता सामने आ रही है कि परिसर में कुछ लोग मदिरा सेवन एवं अन्य अनुचित गतिविधियां करते हैं। इससे न केवल स्थल की पवित्रता प्रभावित होती है बल्कि ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है।
जैन समाज के स्थानीय एक प्रमुख दिलीप जैन बुंदेलखंडी एवं धरोहर प्रेमियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा संबंधित प्रशासन से मांग की है कि 24 तीर्थंकर गुफा की नियमित निगरानी, सुरक्षा, साफ-सफाई और संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था की जाए। उन्होंने परिसर में अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की भी आवश्यकता जताई गई है।
उन्होंने कहा कि 24 जैन तीर्थकर समेत ऐसी प्राचीन धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं, बल्कि समाज की भी है। लोगों को इन स्थलों की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता समझते हुए स्वच्छता, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए। 24 तीर्थंकर गुफा में शिलाओं पर उकेरी गई प्रतिमाएं महज प्राचीन कलाकृतियां नहीं हैं, बल्कि जैन धर्म के अहिंसा, संयम, तप, त्याग और मोक्षमार्ग की समृद्ध परंपरा की अमर गाथा हैं।
बुंदेलखंड की इस अनमोल विरासत को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। धरोहर प्रेमियों ने आह्वान किया कि महोबा की इस प्राचीन जैन विरासत को पहचान दिलाने, उसके संरक्षण और सम्मान के लिए समाज, प्रशासन एवं संबंधित विभाग मिलकर प्रभावी कदम उठाएं।













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