नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार छठे कारोबारी सत्र तेजी दर्ज की गई। बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में क्रूड ऑयल करीब एक प्रतिशत तक चढ़ गया। निवेशकों में मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ने से कीमतों को मजबूती मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का भाव 56 रुपये यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 8,592 रुपये प्रति बैरल हो गया। अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट भी 56 रुपये यानी 0.67 प्रतिशत की तेजी के साथ 8,391 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया।
US-Iran तनाव से बढ़ी सप्लाई की चिंता
कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चेनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा सीधे सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद बुधवार को कच्चे तेल की तेजी और तेज हुई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर ताजा हमले पूरे किए हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि अगर ईरान की ओर से जवाबी हमले जारी रहे तो आगे भी सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
दूसरी ओर, ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत को भी निशाना बनाकर अपनी जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। इन देशों में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे मौजूद हैं। इससे संघर्ष के दूसरे खाड़ी देशों तक फैलने और तेल टैंकरों की आवाजाही तथा क्षेत्रीय तेल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
वैश्विक बाजार में भी क्रूड महंगा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली।
ब्रेंट क्रूड का नवंबर डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट 2.36 डॉलर यानी 2.5 प्रतिशत बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ करीब 90.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।
Ceasefire हुआ तो पलट सकती है तेजी
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल क्रूड की कीमतों में तेजी का रुख बना रह सकता है, क्योंकि तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। हालांकि, बाजार में मौजूदा तेजी के कारण कीमतों में अचानक गिरावट का जोखिम भी बना हुआ है।
यदि अमेरिका और ईरान के बीच विश्वसनीय युद्धविराम या कूटनीतिक समझौता सामने आता है, तो तेल की कीमतों में तेजी से उलटफेर हो सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि मध्य पूर्व में तनाव कितना बढ़ता है और इसका वैश्विक तेल आपूर्ति पर वास्तविक कितना असर पड़ता है।