पुरी, 25 अगस्त। ओडिशा के विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन को अधिक व्यवस्थित और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ने मंदिर में भीड़ प्रबंधन और कतार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आईआईटी-भुवनेश्वर को जिम्मेदारी सौंपी है। संस्थान की ओर से तैयार किए गए विभिन्न मॉडलों में से सबसे बेहतर मॉडल का चयन कर जल्द ही उसका पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने मंगलवार को बताया कि आईआईटी-भुवनेश्वर ने मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही और दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए कई मॉडल विकसित किए हैं। इन मॉडलों को भुवनेश्वर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तुत किया गया। बैठक में अधिकारियों और संबंधित पक्षों ने मॉडल की कार्यप्रणाली पर चर्चा की।

मंत्री के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद इसकी निगरानी छत्तीस निजोग और मंदिर प्रशासन द्वारा की जाएगी। छत्तीस निजोग मंदिर के प्रमुख सेवायतों का शीर्ष निकाय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि नई व्यवस्था मंदिर की परंपराओं और धार्मिक प्रक्रियाओं के अनुरूप लागू हो।

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ बनी बड़ी चुनौती

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर 12वीं शताब्दी का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां वर्षभर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में भी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं, जबकि प्रमुख त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

बढ़ती भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है। मंदिर परिसर में एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अब वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से कतार प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना चाहती है।

कानून मंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्शन हो सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।

पांच अलग-अलग रैंप से होंगे दर्शन

प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे खास बात पांच अलग-अलग लकड़ी के रैंप हैं। इन रैंप का इस्तेमाल श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए किया जाएगा। इससे भक्तों की आवाजाही को अलग-अलग मार्गों में बांटने में मदद मिलेगी और एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने की संभावना कम होगी।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए लगभग 8,000 से 10,000 श्रद्धालु प्रति घंटे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे दर्शन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

लकड़ी के रैंप की व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के दौरान बेहतर दृश्य उपलब्ध कराना भी है। भीड़ के बीच पीछे खड़े श्रद्धालुओं को दर्शन में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए कतार और रैंप की संरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

IIT की तकनीक और मंदिर की परंपरा का मेल

श्री जगन्नाथ मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए नई व्यवस्था लागू करते समय तकनीकी समाधान के साथ मंदिर की परंपराओं और सेवायतों की भूमिका को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

आईआईटी-भुवनेश्वर द्वारा तैयार किए गए मॉडल इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान व्यवस्था की व्यावहारिकता, श्रद्धालुओं की आवाजाही, कतार की लंबाई और दर्शन के समय जैसे पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे आगे स्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया जा सकता है।

त्योहारों के दौरान मिल सकता है बड़ा फायदा

श्री जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा समेत विभिन्न प्रमुख धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है। ऐसे समय में भीड़ को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। प्रस्तावित कतार प्रबंधन प्रणाली ऐसी परिस्थितियों में विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।

प्रशासन को उम्मीद है कि अलग-अलग रैंप और व्यवस्थित प्रवेश व्यवस्था से श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहेगी और कतार में अनावश्यक रुकावट कम होगी। इससे मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।

श्रद्धालुओं के लिए क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को एक निर्धारित और व्यवस्थित मार्ग से दर्शन के लिए आगे बढ़ना होगा। पांच अलग-अलग रैंप के जरिए भक्तों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। इससे धक्का-मुक्की और अव्यवस्थित भीड़ की स्थिति को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि नई प्रणाली लागू होने पर हर घंटे हजारों श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराया जा सकेगा। हालांकि अंतिम व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट और उसके मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुरी जगन्नाथ मंदिर में तकनीक आधारित यह पहल श्रद्धालु सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आईआईटी-भुवनेश्वर का कौन सा मॉडल अंतिम रूप से चुना जाता है और नई कतार व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

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