6 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को INDIA ब्लॉक के निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों के अधिकारों को छीनने की दिशा में काम कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार सरकार के निर्देश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में हासिल किया गया सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार भी कथित तौर पर प्रभावित किया जा रहा है।

INDIA ब्लॉक का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के सामने अपनी चिंताओं को रखने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही। यह विरोध विपक्ष के व्यापक ‘Save Democracy’ अभियान का हिस्सा बताया गया, जिसके तहत INDIA ब्लॉक के नेता निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम कर रहे हैं।

खड़गे ने CEC पर लगाया सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों के अधिकारों को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद नागरिकों को मिला सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन उनके अनुसार मौजूदा सरकार इसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सरकार की ‘कठपुतली’ बताते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से जो निर्देश दिए जाते हैं, चुनाव आयोग उसी के अनुसार काम करता है।

यह आरोप खड़गे के बयान का हिस्सा हैं। उन्होंने दावा किया कि संस्थाओं के इस तरह काम करने से देश के लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर असर पड़ेगा। खड़गे ने अपने बयान में लोकतांत्रिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि ऐसी स्थिति देश को एक अलग तरह के शासन की ओर ले जा सकती है।

‘लोगों को दोबारा गुलामी की ओर धकेला जा रहा’: खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के नागरिकों को दोबारा अधीनता की ओर धकेला जा रहा है।

खड़गे ने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी हासिल की, उन्हें एक बार फिर गुलामी की ओर धकेले जाने की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से INDIA गठबंधन के नेता इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए संघर्ष करता रहेगा और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि INDIA गठबंधन के नेता इस अभियान को आगे बढ़ाते रहेंगे।

Karti Chidambaram ने SIR को लेकर उठाए सवाल

मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी निर्वाचन आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के कारण नागरिकों को उनके मतदान के मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

चिदंबरम ने कहा कि भारत का कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे वोट देने का मौलिक अधिकार है। उनके अनुसार निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही SIR प्रक्रिया इस अधिकार को प्रभावित कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है और SIR प्रक्रिया से जुड़े दो प्रमुख मुद्दों के रूप में Form 6 और Form 7 को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

Form 6 को लेकर क्या है कांग्रेस का आरोप?

कार्ति चिदंबरम ने Form 6 को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फॉर्म पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उनके अनुसार इस फॉर्म में यह पूछा जा रहा है कि आवेदक के माता-पिता और दादा-दादी मतदाता थे या नहीं और उन्होंने कहां मतदान किया था।

चिदंबरम ने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति का मतदान करने का अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं हो सकता कि उसके माता-पिता या दादा-दादी मतदाता थे या नहीं। उन्होंने पूछा कि Form 6 में इस तरह के सवाल किसने शामिल किए हैं।

उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति इन सवालों से आगे नहीं बढ़ पाता है तो वह मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज नहीं करा सकेगा। चिदंबरम ने इसी आधार पर SIR प्रक्रिया और Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा।

CEC के फैसलों को लेकर भी सवाल

कार्ति चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि निर्वाचन आयोग के स्तर पर लिए गए फैसले सर्वसम्मति से लिए गए या बहुमत के आधार पर। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले निर्णय नहीं ले सकते।

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि यदि ऐसे फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले लिए हैं तो उनके अनुसार यह निर्णय कानूनी रूप से सवालों के घेरे में आता है। उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया को भी चुनौती दी और इसे ‘अवैध’ तथा अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस मामले में तुरंत सुधार करना चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

Form 7 को लेकर भी कांग्रेस ने उठाया मुद्दा

कार्ति चिदंबरम ने Form 7 को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि Form 7 का इस्तेमाल उन मतदाताओं की जानकारी देने के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो किसी अन्य स्थान पर चले गए हैं।

हालांकि, चिदंबरम ने आरोप लगाया कि इस फॉर्म का इस्तेमाल मतदाताओं के नाम बड़े स्तर पर हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि BJP के एक कार्यकर्ता ने 7,000 Form 7 आवेदन दाखिल किए, जिनका उद्देश्य मतदाताओं के नाम हटाना था।

उन्होंने इसे प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और आरोप लगाया कि SIR के दौरान अवैधता, प्रक्रिया के दुरुपयोग और मताधिकार से वंचित किए जाने जैसी स्थिति पैदा हो रही है।

इन आरोपों के आधार पर चिदंबरम ने कहा कि यदि मतदाता सूची में ही खामी होगी तो उस मतदाता सूची के आधार पर होने वाले चुनाव के नतीजे की वैधता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे। उन्होंने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

BJP के आरोप पर Karti Chidambaram का जवाब

BJP नेता संबित पात्रा द्वारा कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग को अनावश्यक रूप से निशाना बनाने और देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश करने के आरोप पर भी कार्ति चिदंबरम ने प्रतिक्रिया दी।

चिदंबरम ने कहा कि SIR को लेकर सवाल केवल कांग्रेस नहीं उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश, एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, सिविल सोसाइटी, पूर्व नौकरशाह और युवा भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस की आवाज नहीं है बल्कि उनके अनुसार कई वर्ग इस मुद्दे को उठा रहे हैं। चिदंबरम ने इसे लोकतंत्र से जुड़ा बुनियादी सवाल बताया।

उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है तो उस मतदाता सूची के आधार पर होने वाले चुनाव के परिणाम की विश्वसनीयता और वैधता भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऐसी मतदाता सूची जरूरी है जिसमें पूरी तरह से विश्वसनीयता हो।

Election Commission के खिलाफ INDIA ब्लॉक का मार्च

यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार को उस समय सामने आया जब विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेताओं और सांसदों ने राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग की ओर मार्च किया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए।

INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेताओं ने मार्च में हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के सामने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल रखने की बात कही।

यह प्रदर्शन विपक्ष के ‘Save Democracy’ अभियान के तहत आयोजित किया गया। इस अभियान के अंतर्गत विपक्षी नेता निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

निर्वाचन आयोग की ओर मार्च को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिले। विपक्षी नेताओं ने विशेष रूप से SIR, मतदाता सूची और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया।

मंगलवार का INDIA ब्लॉक मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ आगे बढ़ा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने SIR और Form 6 तथा Form 7 को लेकर सवाल उठाए।

विपक्ष की ओर से इन मुद्दों को लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़कर उठाया गया है। खड़गे और चिदंबरम के बयान राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

INDIA ब्लॉक ने संकेत दिया है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े इन मुद्दों को लेकर उसका अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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