पंकज धामा मौत मामला: तीन आरोपियों की जमानत रद्द, 18 अगस्त तक सरेंडर का आदेश
खेकड़ा| बागपत निवासी दिल्ली मेट्रो सुरक्षा गार्ड पंकज धामा की मौत के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को पहले दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। अदालत ने आरोपियों को 18 अगस्त 2026 तक आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
20 जून को शाहदरा रेलवे स्टेशन पर हुआ था विवाद
यह मामला 20 जून 2026 की सुबह दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार पंकज धामा योगा एक्सप्रेस से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान ट्रेन में चढ़ने और यात्रियों की आवाजाही को लेकर विवाद हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया।
पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान पंकज धामा के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। उन्हें गंभीर हालत में गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB Hospital) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पुलिस ने मामले में BNS की धारा 105 और धारा 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
कौन थे पंकज धामा?
पंकज धामा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा क्षेत्र के निवासी थे और दिल्ली में दिल्ली मेट्रो से जुड़े सुरक्षा कार्य में तैनात थे। रिपोर्टों के मुताबिक वह ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने गांव लौट रहे थे, तभी शाहदरा रेलवे स्टेशन पर यह घटना हुई।
घटना के बाद सामने आए वीडियो ने भी मामले को चर्चा में ला दिया था। वीडियो में प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बीच कथित मारपीट और पुलिसकर्मी के हस्तक्षेप की तस्वीरें दिखाई देने की बात सामने आई थी। हालांकि किसी वायरल वीडियो की प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही किया जाना है।
तीन आरोपियों को पहले मिल गई थी जमानत
घटना के बाद पुलिस ने मामले में आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सागर, प्रिंस और आकाश नाम के तीन वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था और उन्हें जमानत मिल गई थी। तीन अन्य आरोपी नाबालिग बताए गए थे, जिन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया था।
जमानत मिलने के बाद मृतक के परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। बागपत में भी इस मामले को लेकर आरोपियों को जल्द जमानत मिलने पर सवाल उठाए गए थे।
अब अदालत ने क्यों रद्द की जमानत?
मामले में बाद की न्यायिक कार्रवाई में अदालत ने पहले दी गई जमानत को कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत ने पाया कि पहली पेशी के दौरान जमानत देते समय आवश्यक वैधानिक संतुष्टि दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह नहीं अपनाई गई थी।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि पीड़ित परिवार को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। इसी आधार पर पहले दी गई जमानत को रद्द कर दिया गया।
यह बिंदु मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपराधिक मामलों में आरोपी को जमानत देने से पहले अदालत को कानून में निर्धारित आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। पीड़ित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए जाने से जुड़े प्रावधान भी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
18 अगस्त तक करना होगा आत्मसमर्पण
अदालत के आदेश के बाद तीनों आरोपियों के सामने अब तत्काल अगला कदम 18 अगस्त 2026 तक आत्मसमर्पण करना है।
इसका अर्थ यह है कि पहले मिली जमानत के आधार पर वे उसी स्थिति में बाहर नहीं रह सकते। उन्हें अदालत के निर्देश का पालन करते हुए निर्धारित समय सीमा में सरेंडर करना होगा।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि आरोपियों के लिए आगे जमानत का कानूनी रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपी कानून के तहत सक्षम अदालत के समक्ष नए सिरे से नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। उस आवेदन पर अदालत मामले के तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेगी।
जांच में CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों की भूमिका अहम
घटना के शुरुआती चरण में पुलिस ने रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की बात कही थी। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया था।
ऐसे मामलों में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो फुटेज जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। हालांकि किसी भी साक्ष्य की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में उसके परीक्षण के बाद ही तय होती है।
परिवार के लिए न्याय की लड़ाई का अगला चरण
पंकज धामा की मौत के बाद परिवार की ओर से आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और न्याय की मांग की गई थी। शुरुआती जमानत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों की नाराजगी भी सामने आई थी। अब जमानत रद्द होने और आरोपियों को सरेंडर का आदेश दिए जाने से मामले की कानूनी प्रक्रिया नए चरण में पहुंच गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आरोपी निर्धारित समय में अदालत के सामने आत्मसमर्पण करते हैं या नहीं और इसके बाद उनकी ओर से नियमित जमानत के लिए क्या कानूनी कदम उठाया जाता है।
आगे क्या होगा?
18 अगस्त 2026 की समय सीमा इस मामले में अहम है। आरोपियों के सरेंडर के बाद अदालत में आगे की सुनवाई, संभावित नियमित जमानत याचिका और जांच से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
BaghpatWire इस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई, जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई से जुड़े अपडेट को तथ्यात्मक एवं सत्यापित जानकारी के साथ पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।














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