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एएआई को हवाई अड्डा संचालक के एयरलाइंस स्वामित्व के नियम में छूट के अनुरोध मिले हैं: सरकार

नयी दिल्ली, 10 अगस्त : सरकार ने सोमवार को स्वीकार किया कि हवाई अड्डा संचालक के विमान सेवा कंपनी का स्वामित्व रखने के नियम में छूट के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को अनुरोध प्राप्त हुए हैं। 
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। माकपा के जॉन ब्रिटास के प्रश्न के उत्तर में श्री मोहोल ने कहा कि बड़े हवाई अड्डों के संचालकों के विमान सेवा कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखने पर प्रतिबंध के बारे में सरकार की कोई नीति नहीं है, लेकिन निजी सार्वजनिक भागीदारी के आधार पर हवाई अड्डों का संचालन कर रही कुछ कंपनियों के साथ करार में इसकी सीमा तय कर दी गयी है। 
उल्लेखनीय है कि एएआई के साथ मौजूदा करारों के अनुसार, ये कंपनियां किसी विमान सेवा कंपनी में 10 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी नहीं रख सकतीं। 
श्री मोहोल ने बताया कि इस सीमा में छूट के लिए एएआई को अनुरोध प्राप्त हुए हैं हालांकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं किया है। 
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक एक पत्र साझा किया था जो कथित तौर पर अडानी एयरपोर्ट्स की तरफ से एएआई को 04 जून 2026 को लिखा गया था। इसमें प्राधिकरण से उस नियम में छूट का अनुरोध किया गया है। हालांकि अडानी एयरपोर्ट्स से सूत्रों ने इस पत्र से सही होने की पुष्टि नहीं की है। 
पिछले महीने मीडिया में खबर आयी थी कि सरकार अडानी तथा दूसरी हवाई अड्डा संचालक कंपनियों को एयरलाइंस का स्वामित्व रखने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। अडानी समूह ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि फिलहाल विमान सेवा कारोबार में प्रवेश की उसकी कोई मंशा नहीं है। 
मामले की जानकारी रखने वाले उद्योग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि इस मामले में अडानी एयरपोर्ट्स ने एएआई को पत्र लिखा था जिसमें 10 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने की बात कही गयी थी। उन्होंने बताया कि पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के बाद निजी हवाई अड्डा संचालकों से सरकार ने एयरलाइंस कारोबार में उनके प्रवेश की संभावना के बारे में राय मांगी थी।
नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राम मोहन नायडू स्वयं कई मौकों पर कह चुके हैं कि देश में दो विमान सेवा कंपनियों के पास 90 प्रतिशत से अधिक बाजार पर कब्जा होना ठीक नहीं है और वह चाहते हैं कि नयी विमान सेवा कंपनियां सामने आयें।

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