चंडीगढ़, 10 अगस्त : पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों, गांवों और कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए ब्यास और सतलुज दरियाओं के संवेदनशील हिस्सों में बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाये हैं।
विधानसभा में विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह द्वारा अमृतसर रोड स्थित ब्यास पुल से हरिके पत्तन तक नदी के किनारे संवेदनशील स्थानों और विधायक रजनीश कुमार दहिया द्वारा उप-तहसील ममदोट क्षेत्र में सतलुज नदी से संबंधित बाढ़ सुरक्षा ढांचे को लेकर उठाये गये।
ध्यानाकर्षण प्रस्तावों का जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि सरकार ने संवेदनशील स्थानों की पहचान और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करने के लिए तकनीकी एवं योजनाबद्ध प्रक्रिया अपनायी है।
श्री गोयल ने बताया कि ब्यास नदी के किनारे अमृतपुर, भरोआणा, शेख मांगा, सरूपवाल, भागोबुड्ढा, आलूवाल, लोधीवाल, यूसुफपुर दरवाल, तकिया, गिद्दड़पिंडी, बाऊपुर आइलैंड, आहली खुर्द, आहली कलां, चूहड़पुर, शेरपुर डोगरा, खिजरपुर, मंसूरवाल, बुताला, ढिल्लवां, गोइंदवाल, वैरोवाल, हंसावाला, घड़का और मरड़ सहित कई संवेदनशील स्थानों की पहचान की गयी है। उन्होंने कहा कि इन संवेदनशील स्थानों पर राज्य सरकार के फंड से 32.09 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य करवाये गये हैं। इनमें से 12 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि एक कार्य प्रगति पर है।
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि कपूरथला जिले के गांव अमृतपुर राजेवाल में ब्यास के बाएं किनारे पर स. आत्मा सिंह एडवांस बांध नंबर-1 के आरडी 45,250 के डाउनस्ट्रीम में स्टड, रिवेटमेंट और स्पर्स के निर्माण के माध्यम से नदी के कटाव को रोकने के उपाय किये गये हैं। इसके अलावा आरडी 117,000 से आरडी 152,000 के बीच बाढ़ जोखिम कम करने तथा पश्चिमी वीण के दोनों किनारों पर बाढ़ सुरक्षा के कार्य भी पूरे किये गये हैं।
उन्होंने बताया कि कपूरथला और जालंधर जिलों में गिद्दड़पिंडी एक्सटेंशन रिवर एज क्षेत्र में सतलुज के साथ बाढ़ जोखिम कम करने के कार्य भी पूरे किये गये हैं। वर्ष 2025 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त एडवांस बांध नंबर-2 और सुज्जो कालिया एडवांस बांध की मरम्मत एवं मजबूती का काम भी पूरा कर लिया गया है।
श्री गोयल के अनुसार ढिल्लवां के अपस्ट्रीम क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, गोइंदवाल बांध, वैरोवाल बांध और गाइड बांध को ऊंचा एवं मजबूत करने तथा गांव घड़का में ब्यास के दोनों किनारों पर रिवेटमेंट के कार्य पूरे हो चुके हैं।
गांव मरड़ में ब्यास के दाएं किनारे पर 360 फुट रिवेटमेंट का कार्य अभी जारी है। उन्होंने बताया कि राज्य फंड के अलावा मनरेगा के तहत आहली कलां, आहली खुर्द, सफदरपुर-खिजरपुर और घड़का के आसपास 11.98 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा एवं कटाव रोकने संबंधी कार्य करवाये गये हैं। इनका उद्देश्य गांवों और कृषि भूमि को बाढ़ तथा नदी द्वारा लाई जाने वाली गाद से बचाना है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच बाढ़ सीजन के दौरान ब्यास के इस हिस्से में किसी भी बाढ़ सुरक्षा बांध में दरार नहीं आयी।
ममदोट क्षेत्र के संबंध में श्री गोयल ने बताया कि उप-तहसील के गांव दोना तेलू मल्ल, कालू अराइयां हिठाड़, फत्तेवाला हिठाड़, रुहेला हाजी, गंधू किलचा हिठाड़ और निहाला किलचा सतलुज के बाएं किनारे से संबंधित हैं। इनमें गंधू किलचा हिठाड़ और दोना तेलू मल्ल नदी के किनारे स्थित हैं, जबकि अन्य गांव कुछ दूरी पर हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ सुरक्षा ढांचे की पहचान स्टड नंबरों के बजाय बाढ़ सुरक्षा बांध की आरडी प्रणाली के आधार पर की जाती है। वर्ष 1995 के आसपास गांव दोना तेलू मल्ल में आरडी 12,410 से आरडी 16,500 के बीच बाढ़ सुरक्षा बांध के साथ कुछ ढांचे बनाए गए थे। पिछले बाढ़ सीजन में पानी का स्तर बढ़ने और जलमग्नता के कारण बर्म के साथ दो स्पर्स और आठ स्टड क्षतिग्रस्त हुए थे, हालांकि बाढ़ सुरक्षा बांध सुरक्षित रहा।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त ढांचों का फील्ड निरीक्षण किया जा चुका है। फील्ड स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर मरम्मत एवं पुनर्निर्माण का प्रस्ताव बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल किया गया है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के बाढ़ तैयारी कार्यक्रम के तहत ममदोट क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों की समीक्षा भी पूरी कर ली गयी है। संबंधित समितियों ने फील्ड निरीक्षण के बाद आवश्यक तकनीकी उपायों की सिफारिश की और कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप दिया गया।
श्री गोयल ने बताया कि ममदोट क्षेत्र में गांव गंधू किलचा हिठाड़ में आरडी 10,650 से आरडी 11,700 के बीच एक नया स्पर, 700 फुट जियो-बैग रिवेटमेंट और पांच स्टड का निर्माण किया गया है। इन कार्यों पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। उन्होंने कहा कि इन उपायों से क्षेत्र के बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिली है और भविष्य में बाढ़ की स्थिति में सतलुज के किनारे बसे गांवों तथा कृषि भूमि की सुरक्षा बेहतर होगी। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार बाढ़ सुरक्षा ढांचे को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करने और संवेदनशील स्थानों पर समय रहते निवारक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि लोगों की जान-माल और कृषि भूमि को बाढ़ एवं कटाव से बचाया जा सके।
ब्यास, सतलुज दरियाओं पर बाढ़ सुरक्षा ढांचा मजबूत कर रही पंजाब सरकार: गोयल













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