3 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल वाममोर्चा और उसके सहयोगी दलों ने कोलकाता में विशाल रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR प्रक्रिया तत्काल रोकने और मतदाता सूची से हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग उठाई। वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज में स्वतंत्रता और पारदर्शिता बहाल करने की भी मांग की।
यह रैली विपक्षी दलों की ओर से 2 से 8 अक्टूबर तक चलाए जा रहे ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ अभियान का हिस्सा थी। वामदलों ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका विरोध केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में अभियान चलाया जाएगा।
रानी रासमणि एवेन्यू से शुरू हुआ मार्च
कोलकाता में आयोजित इस विरोध मार्च की शुरुआत रानी रासमणि एवेन्यू से हुई। यहां पहले वामपंथी नेताओं की एक सभा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वामपंथी नेता श्रीदीप भट्टाचार्य ने की। सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च शुरू किया।
यह मार्च एस्प्लेनेड बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन और प्रेस क्लब से गुजरते हुए महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास समाप्त हुआ। गांधी जयंती के अवसर पर प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मार्च शुरू करने से पहले वामपंथी नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ता और नेता रैली में शामिल हुए।
SIR रोकने और हटाए गए नाम बहाल करने की मांग
वाममोर्चा और उसके सहयोगी दलों ने इस रैली के माध्यम से चार प्रमुख मांगें उठाईं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को वापस लेना, सूची से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करना और चुनाव आयोग के स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कामकाज को सुनिश्चित करना शामिल है।
वामदलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से की जाए। वामपंथी नेताओं ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
रैली से पहले आयोजित सभा को संबोधित करते हुए माकपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि देश में संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है और चुनाव आयोग जिस तरह से काम कर रहा है, उससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
मोहम्मद सलीम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और उनके कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में संवैधानिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
सलीम ने अपने संबोधन में कहा, “आज संविधान को नष्ट किया जा रहा है। श्री कुमार को नियुक्त कर संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।”
उनके इस बयान के जरिए वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
भाजपा और अमित शाह की नीतियों पर भी निशाना
कोलकाता में आयोजित इस रैली के दौरान वामपंथी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
मोहम्मद सलीम ने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं।
वामपंथी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान सभी पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर वामपंथी नेताओं की ओर से लगाए गए ये आरोप हैं। रैली में इन मुद्दों को उठाते हुए नेताओं ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हटाए गए नामों की बहाली की मांग की।
दो से आठ अक्टूबर तक चलेगा ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ अभियान
कोलकाता की यह रैली विपक्षी दलों के देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ अभियान के तहत आयोजित की गई। यह अभियान 2 अक्टूबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक चलेगा।
पश्चिम बंगाल के वामदलों ने घोषणा की कि इस अवधि के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
वामदलों का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची से जुड़े विवादों का समाधान करने की मांग की।
कई वामपंथी दलों और नागरिक संगठनों ने लिया हिस्सा
इस रैली का आयोजन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाममोर्चा ने किया था। इसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भाकपा-माले (लिबरेशन), एसयूसीआई (सी), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और फॉरवर्ड ब्लॉक सहित करीब 10 वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (APDR) सहित कई मानवाधिकार और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
रैली में मोहम्मद सलीम के अलावा सुजान चक्रवर्ती, प्रबीर देब, कार्तिक पाल और देबाशीष मुखर्जी समेत कई प्रमुख वामपंथी नेता मौजूद रहे।
विभिन्न संगठनों की भागीदारी के कारण यह प्रदर्शन केवल वाममोर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें मानवाधिकार और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर उठाए सवाल
रैली में शामिल वामपंथी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद कई फैसले लिए गए।
नेताओं ने इसे संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंता का विषय बताया। उनका कहना था कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और उसकी निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।
वामदलों ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें या उन्हें पद से हटाया जाए। नेताओं ने इसे मतदाताओं के चुनावी अधिकारों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
SIR के विरोध में राज्यभर में आंदोलन जारी रखने का ऐलान
गांधी जयंती के अवसर पर निकाली गई इस रैली के माध्यम से पश्चिम बंगाल के वामपंथी दलों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
वामदलों ने कहा कि 8 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली, SIR प्रक्रिया को रोकने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रहेगी।
कोलकाता में हुई इस रैली के साथ पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विरोध का एक और कार्यक्रम सामने आया है। अब वामदलों का ध्यान राज्यभर में अपने अभियान को आगे बढ़ाने और अपनी चार सूत्री मांगों को उठाने पर रहेगा।
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