3 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

कटवा (पूर्व बर्धमान): पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई के बाद दो गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आतंकी संगठन से कथित संबंधों के आरोप में वरिष्ठ इमाम पियार मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी के बाद कुलुट और पालिशग्राम गांवों के लोग हैरान हैं। स्थानीय मस्जिद में इमाम के रूप में पहचान रखने वाले शेख पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के नए नेटवर्क के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है।

एनआईए के मुताबिक, पियार मोहम्मद शेख कथित तौर पर ‘इमाम महमूद काफिला’ (IMK) नाम से सक्रिय एक संगठन के लिए काम कर रहे थे। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस संगठन का उद्देश्य पश्चिम बंगाल समेत देश के विभिन्न राज्यों में अपना नेटवर्क स्थापित करना था। हालांकि, शेख के परिजनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निर्दोष बताया है।

इमाम की गिरफ्तारी से गांवों में हैरानी

पूर्व बर्धमान जिले के मंगलकोट क्षेत्र के पालिशग्राम की मस्जिद में पियार मोहम्मद शेख इमाम के रूप में कार्यरत थे। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में थी। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद गांव में हैरानी का माहौल है।

शेख की गिरफ्तारी के बाद कुलुट और पालिशग्राम गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों के लिए यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जिस व्यक्ति को वे धार्मिक गतिविधियों से जोड़कर देखते थे, उस पर अब प्रतिबंधित आतंकी संगठन से संबंध रखने के गंभीर आरोप लगे हैं।

एनआईए की जांच में शेख की कथित गतिविधियों और विभिन्न राज्यों में उनके संपर्कों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है।

बांग्लादेश यात्रा को लेकर जांच एजेंसी को संदेह

पियार मोहम्मद शेख के परिवार ने उनकी बांग्लादेश यात्रा को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनके बेटे मिजानुर रहमान के अनुसार, उनके पिता जून 2025 में नौ दिनों के वैध वीजा पर बांग्लादेश गए थे। परिवार का दावा है कि यह यात्रा तबलीगी जमात से संबंधित धार्मिक गतिविधियों के लिए की गई थी।

हालांकि, एनआईए को उनकी यात्रा के संबंध में कुछ संदेह हैं। जांच एजेंसी को मस्जिद समिति के बयानों और जांच के दौरान सामने आई जानकारियों में अंतर मिला है।

इसी आधार पर एजेंसी को संदेह है कि शेख ने अपनी वैध यात्रा के बाद त्रिपुरा सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पार की हो सकती है। फिलहाल यह जांच का विषय है और इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

परिजनों का कहना है कि शेख निर्दोष हैं और उन्हें गलत आरोपों में फंसाया जा रहा है। दूसरी ओर, एनआईए उनके यात्रा विवरण और कथित संपर्कों की जांच कर रही है।

2014 के खागड़ागढ़ विस्फोट के बाद फिर सक्रिय हुआ JMB?

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2014 में पश्चिम बंगाल के खागड़ागढ़ में हुए विस्फोट के बाद जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) कई गुटों में बंट गया था। अब जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस संगठन से जुड़े कुछ लोग ‘इमाम महमूद काफिला’ (IMK) के नाम से फिर से नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

एनआईए का आरोप है कि इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य पश्चिम बंगाल से आगे बढ़कर देश के दूसरे राज्यों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार करना था।

जांच एजेंसी के अनुसार, पियार मोहम्मद शेख को इस कथित विस्तार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि धार्मिक शिक्षा की आड़ में युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है। फिलहाल एनआईए विभिन्न राज्यों में कथित नेटवर्क की गतिविधियों और उसके सदस्यों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।

बंगाल, असम और त्रिपुरा में कट्टरपंथी कक्षाएं चलाने का आरोप

एनआईए के एक अधिकारी के अनुसार, पियार मोहम्मद शेख पिछले करीब तीन वर्षों से पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में कथित तौर पर कट्टरपंथी कक्षाएं चला रहे थे।

जांच एजेंसी को संदेह है कि उनका मुख्य उद्देश्य असम के सभी जिलों में इस नेटवर्क का विस्तार करना था। इसके लिए कथित तौर पर अलग-अलग टीमों के माध्यम से काम किया जा रहा था।

जांच में सामने आए विवरणों के अनुसार, इस नेटवर्क में अलग-अलग जिम्मेदारियां बांटी गई थीं। एक टीम का काम युवाओं और प्रवासी मजदूरों को कथित तौर पर संगठन से जोड़ना था, जबकि दूसरी टीम सोशल नेटवर्क के माध्यम से संदेशों का प्रसार करती थी।

एनआईए अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और अलग-अलग राज्यों में इसके संपर्क किस स्तर तक फैले हुए थे।

एनक्रिप्टेड टेलीग्राम चैनल के इस्तेमाल का दावा

जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित नेटवर्क के सदस्य आपस में संपर्क बनाए रखने के लिए एनक्रिप्टेड डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें टेलीग्राम पर संचालित ‘पूर्वेर आकाश’ नामक चैनल का भी उल्लेख किया गया है।

एनआईए का दावा है कि पियार मोहम्मद शेख अपनी गतिविधियों को गोपनीय रखते थे और एनक्रिप्टेड ऐप के माध्यम से बांग्लादेश में मौजूद कथित आकाओं के संपर्क में थे।

जांच एजेंसी अब इस डिजिटल नेटवर्क से संबंधित जानकारियों की पड़ताल कर रही है। इसके तहत कथित संपर्कों, संदेशों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित नेटवर्क का संचालन किस प्रकार किया जा रहा था और इसमें शामिल लोगों के बीच क्या संबंध थे।

29 सितंबर को तीन राज्यों में एनआईए की छापेमारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 29 सितंबर को पश्चिम बंगाल, असम और केरल में एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान पियार मोहम्मद शेख समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

एनआईए की कार्रवाई का उद्देश्य कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करना और उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना था।

गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने शेख के पास से जब्त किए गए दस्तावेजों, उनके यात्रा विवरण और कथित फंडिंग नेटवर्क की जांच शुरू की है।

एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित संगठन को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही थी और इसके लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

जांच के दायरे में फंडिंग और सीमा पार संपर्क

पियार मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी के बाद एनआईए की जांच का दायरा अब कथित वित्तीय लेनदेन और सीमा पार संपर्कों तक पहुंच गया है।

जांच एजेंसी उनके यात्रा रिकॉर्ड, जब्त दस्तावेजों और डिजिटल संपर्कों की मदद से कथित नेटवर्क की गतिविधियों को समझने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा, बंगाल, असम और त्रिपुरा में कथित तौर पर संचालित गतिविधियों के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।

हालांकि, अभी तक जांच के सभी निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए गिरफ्तारी के बाद सामने आए आरोपों और जांच एजेंसी के दावों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

पूर्व बर्धमान जिले में पहले भी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामलों के सामने आने के कारण पियार मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को फिर चर्चा में ला दिया है।

इस मामले में एनआईए की जांच अब कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, उनकी गतिविधियों और वित्तीय स्रोतों की पहचान पर केंद्रित है।

फिलहाल कुलुट और पालिशग्राम के लोग इस मामले में जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर परिवार शेख को निर्दोष बता रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसी उनके कथित आतंकी संपर्कों से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।

आने वाले दिनों में एनआईए की जांच से इस कथित नेटवर्क की संरचना, उसके संपर्कों और गतिविधियों को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

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