प्रकाशित तिथि: 24 सितंबर 2026
नई दिल्ली। भारत का निर्वाचन आयोग इन दिनों चर्चा में है। चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर दर्ज कराई गई आपत्तियों और विपक्षी दलों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग के बीच निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्थिति, संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
आपके दिए गए कंटेंट के अनुसार, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ फैसलों को “अनधिकृत और अवैध” बताया गया। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
भारत निर्वाचन आयोग क्या है?
भारत निर्वाचन आयोग यानी Election Commission of India (ECI) एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी और इसका सचिवालय नई दिल्ली में है।
निर्वाचन आयोग लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का प्रबंधन करता है।
वहीं, पंचायत और नगर निकायों के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग के अधीन नहीं आते। इनके चुनाव संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग कराते हैं।
संविधान में निर्वाचन आयोग का आधार
भारतीय संविधान के भाग XV में चुनावों से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। इसमें अनुच्छेद 324 से 329 तक निर्वाचन व्यवस्था का संवैधानिक आधार दिया गया है।
अनुच्छेद 324: चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग में निहित है।
अनुच्छेद 325: धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति को मतदाता सूची से वंचित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 326: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होते हैं।
अनुच्छेद 327: संसद को विधायिकाओं के चुनाव से संबंधित प्रावधान करने की शक्ति प्रदान करता है।
अनुच्छेद 328: राज्य के विधानमंडल को अपने विधानमंडल के चुनाव के संबंध में प्रावधान करने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 329: चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक से संबंधित प्रावधान करता है।
निर्वाचन आयोग की संरचना
निर्वाचन आयोग की शुरुआत में केवल एक निर्वाचन आयुक्त हुआ करते थे। वर्ष 1989 के बाद इसे बहु-सदस्यीय निकाय बनाया गया।
वर्तमान संरचना में:
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC)
- दो निर्वाचन आयुक्त (ECs)
शामिल हैं।
राज्यों में निर्वाचन आयोग के कामकाज में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) सहायता करते हैं।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कार्यकाल
दिए गए कंटेंट के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, निर्धारित है।
CEC और EC का वेतन एवं सेवा शर्तें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर बताई गई हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
निर्वाचन आयोग से जुड़ी प्रमुख संवैधानिक सीमाएं
संविधान में निर्वाचन आयोग के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
- निर्वाचन आयुक्तों के लिए कोई विशिष्ट शैक्षिक, कानूनी या प्रशासनिक योग्यता संविधान में निर्धारित नहीं है।
- संविधान में निर्वाचन आयोग के सदस्यों के कार्यकाल को स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है।
- सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी नियुक्ति पर संविधान में कोई स्पष्ट रोक नहीं है।
किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति समिति की बात कही थी?
निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का एक महत्वपूर्ण फैसला भी चर्चा में रहा है। पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाएगी।
इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया गया था।
निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका को समझने के लिए अनुच्छेद 324 से 329 तक के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। यही प्रावधान भारत की चुनावी व्यवस्था में निर्वाचन आयोग की भूमिका और शक्तियों का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।
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