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Lust Stories 3 Review: चार कहानियां, रिश्तों की उलझन और बेबाक अंदाज में पेश की गई चाहत

Lust Stories 3 Review: नेटफ्लिक्स की चर्चित एंथोलॉजी फ्रेंचाइजी ‘Lust Stories’ तीसरे पार्ट के साथ एक बार फिर रिश्तों, आकर्षण और मानवीय इच्छाओं को अलग-अलग नजरिए से सामने लाती है। इस बार फिल्म में विक्रमादित्य मोटवानी, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज चार अलग-अलग कहानियां लेकर आए हैं।

पहले पार्ट में जहां सेक्स और इच्छाओं को समाज में सामान्य मानवीय भावनाओं के तौर पर देखने की कोशिश की गई थी, वहीं दूसरे पार्ट ने रिश्तों और आकर्षण से जुड़े सामाजिक पहलुओं को तलाशा। तीसरा भाग इन विषयों को अपेक्षाकृत हल्के, हास्यपूर्ण और मनोरंजक अंदाज में पेश करता है।

चार निर्देशक, चार अलग कहानियां

‘Lust Stories 3’ की सबसे खास बात इसका एंथोलॉजी फॉर्मेट है। चारों निर्देशक अपनी-अपनी शैली में रिश्तों और आकर्षण की अलग तस्वीर पेश करते हैं। कहानियां कहीं-कहीं एक-दूसरे से जुड़ती हुई महसूस होती हैं, लेकिन अपनी अलग पहचान भी बनाए रखती हैं।

विक्रमादित्य मोटवानी की ‘Consenting Adults’

फिल्म की शुरुआत विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी ‘Consenting Adults’ से होती है। इसमें कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे मुख्य भूमिकाओं में हैं।

कहानी दो महिलाओं की दोस्ती और उनके रिश्तों के बीच पैदा होने वाली एक असामान्य परिस्थिति के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों किरदार सामाजिक संकोच से बाहर निकलकर अपने रिश्तों को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश करते हैं।

विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी कहानी में ऐसे किरदार निभाते हैं जो घटनाओं के बीच हास्य और असहजता दोनों पैदा करते हैं। हालांकि कहानी का केंद्र पुरुष किरदारों की प्रतिक्रिया से ज्यादा दोनों महिलाओं की दोस्ती और आपसी समझ बनी रहती है।

कोंकणा और राधिका की स्क्रीन केमिस्ट्री इस हिस्से को मजबूती देती है।

किरण राव की कहानी

इसके बाद किरण राव की कहानी आती है, जिसमें एक पिज्जा डिलीवरी बॉय और मैनिक्योर आर्टिस्ट के बीच अचानक पैदा हुए आकर्षण को दिखाया गया है।

गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी मुख्य भूमिकाओं में हैं। दोनों के किरदार एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और कहानी बिना किसी लंबे भावनात्मक रिश्ते के एक अलग तरह के संबंध की ओर बढ़ती है।

कहानी में हास्य और ट्विस्ट लाने की कोशिश की गई है। हालांकि चारों कहानियों की तुलना में यह हिस्सा अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली महसूस होता है। कुछ जगहों पर घटनाक्रम और संवाद उतना असर नहीं छोड़ पाते।

शकुन बत्रा की रिश्तों पर कहानी

शकुन बत्रा का सेगमेंट फिल्म का सबसे ज्यादा रिश्तों-केंद्रित हिस्सा है। इसमें राधिका मदान और अली फजल एक ऐसे शादीशुदा जोड़े की भूमिका निभाते हैं, जो तलाक की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

दोनों के बीच रिश्ते में प्यार की जगह नाराजगी और विवाद ने ले ली है। लेकिन इसके बावजूद उनके बीच एक ऐसा जुड़ाव बना हुआ है जिसे वे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते।

कहानी दिलचस्प तरीके से दिखाती है कि कई बार दो लोग बातचीत के सामान्य रास्ते बंद होने के बाद भी एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। परिवार, समाज और शादी को लेकर बनी धारणाएं भी उनके रिश्ते को प्रभावित करती हैं।

राधिका मदान और अली फजल अपने किरदारों की नाराजगी, उलझन और भावनात्मक तनाव को प्रभावी तरीके से सामने लाते हैं।

विशाल भारद्वाज की कहानी सबसे अलग

फिल्म का चौथा और सबसे अलग अंदाज वाला सेगमेंट विशाल भारद्वाज का है। कहानी 1980 के दशक के हैदराबाद की पृष्ठभूमि में रखी गई है।

इसमें अदिति राव हैदरी एक ऐसी महिला का किरदार निभाती हैं, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपनी रचनात्मकता और निजी इच्छाओं को समझने की कोशिश करती है।

वह एक कॉलेज में पढ़ाती हैं और साहित्य में उनकी रुचि धीरे-धीरे उन्हें अपनी कल्पनाओं को लिखने के लिए प्रेरित करती है। सिद्धार्थ और गजराज राव भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देते हैं।

विशाल भारद्वाज इस कहानी में हास्य, पुराने दौर का माहौल और सामाजिक व्यंग्य मिलाकर एक हल्का-फुल्का अंदाज तैयार करते हैं।

अदिति राव हैदरी इस हिस्से की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका अभिनय किरदार में मासूमियत, हास्य और आत्मविश्वास को एक साथ लेकर आता है। गजराज राव भी अपने खास अंदाज से कहानी में मनोरंजन जोड़ते हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत

‘Lust Stories 3’ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि फिल्म रिश्तों और इच्छाओं को केवल गंभीर या भावनात्मक नजरिए से नहीं देखती। इसमें हास्य, व्यंग्य और मनोरंजन का इस्तेमाल किया गया है।

चारों निर्देशकों की शैलियां अलग हैं, इसलिए फिल्म में एकरूपता के बजाय विविधता दिखाई देती है। कुछ कहानियां ज्यादा प्रभावशाली हैं, जबकि कुछ हिस्से अपेक्षाकृत कमजोर नजर आते हैं।

फिर भी एंथोलॉजी का फॉर्मेट दर्शक को लगातार एक नई कहानी और नए किरदार से जोड़ता रहता है।

Acting और Direction

कोंकणा सेन शर्मा, राधिका आप्टे, राधिका मदान, अली फजल और अदिति राव हैदरी अपने-अपने हिस्सों में अच्छा काम करते हैं। खास तौर पर अदिति राव हैदरी का प्रदर्शन फिल्म के अंतिम हिस्से को यादगार बनाने में मदद करता है।

निर्देशकों की बात करें तो विक्रमादित्य मोटवानी और विशाल भारद्वाज अपने सेगमेंट में मनोरंजन और शैली का अच्छा संतुलन बनाते हैं। शकुन बत्रा रिश्तों की जटिलता पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकि किरण राव का हिस्सा हल्के-फुल्के अंदाज में कहानी आगे बढ़ाता है।

Final Verdict

‘Lust Stories 3’ पिछली फिल्मों की तरह रिश्तों और मानवीय इच्छाओं को केंद्र में रखती है, लेकिन इस बार इसका अंदाज ज्यादा हल्का और मनोरंजक है। चार कहानियों में गुणवत्ता एक जैसी नहीं है, लेकिन कुछ शानदार अभिनय और दिलचस्प निर्देशन फिल्म को देखने लायक बनाते हैं।

अगर आपको एंथोलॉजी फिल्में पसंद हैं और रिश्तों पर बनी अलग-अलग शैली की कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो ‘Lust Stories 3’ आपको एक अलग तरह का मनोरंजन दे सकती है।

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