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शामली के आयुष मलिक की हिरासत अवैध, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिहाई का दिया आदेश; कोर्ट में बोले- अपनी मर्जी से अपनाया इस्लाम और चांदनी से किया निकाह

17 सितंबर 2026 | शामली

शामली के आयुष मलिक की हिरासत को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध करार देते हुए उन्हें मुक्त करने का आदेश दिया है। गुरुवार को हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए आयुष मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाया और अपनी इच्छा से चांदनी से निकाह किया। कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की अनुमति दी है।

मामला उस समय सामने आया था, जब आयुष मलिक की फैमिली की ओर से चांदनी और उसके परिवार के खिलाफ धर्मांतरण को लेकर FIR दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि यह FIR हिंदू संगठनों के दबाव में दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में कई लोगों को जेल भेज दिया था।

आयुष को हिरासत में रखने का आरोप

इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुष मलिक को उनकी फैमिली ने अवैध तरीके से हिरासत में रखा हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शामली जिले के पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया था कि आयुष को कोर्ट के सामने पेश किया जाए।

गुरुवार को पुलिस प्रशासन ने आयुष मलिक को हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया। कोर्ट में आयुष ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया है और अपनी मर्जी से ही चांदनी से निकाह किया था।

कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा से रहने की दी अनुमति

आयुष की बात सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत को अवैध करार देते हुए उन्हें मुक्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की अनुमति दी।

इस आदेश के बाद मामले में आयुष की इच्छा और उनके द्वारा कोर्ट के सामने दिए गए बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, चांदनी और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज धर्मांतरण की FIR से जुड़े मामले की पृष्ठभूमि भी इसी विवाद से जुड़ी हुई है।

हाईकोर्ट में आयुष ने खुद रखी अपनी बात

इस पूरे मामले में गुरुवार की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि आयुष मलिक खुद हाईकोर्ट के सामने पेश हुए और उन्होंने अपनी इच्छा को लेकर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि धर्म परिवर्तन और निकाह दोनों उनकी अपनी मर्जी से हुए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयुष को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता दी गई है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई दर्ज FIR और उससे जुड़े प्रकरण के अनुसार जारी रहेगी।

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