कोयंबटूर | 15 सितंबर 2026
अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहीं अभिनेत्री समांथा ने सोमवार को अपनी पारंपरिक बेबी शावर सेरेमनी की झलकियां सोशल मीडिया पर साझा कीं। इस मौके पर फैशन डिज़ाइनर शिल्पा रेड्डी और कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर नीरजा कोना समेत उनकी कई करीबी सहेलियां मौजूद रहीं। गौरतलब है कि जिस ईशा फाउंडेशन में समांथा की शादी हुई थी, उसी जगह पर अब उनकी बेबी शावर सेरेमनी भी आयोजित की गई।
तस्वीरें साझा करते हुए समांथा ने इस रस्म के पीछे की भावना को भी बयां किया। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपराओं के प्रति उनका हमेशा से गहरा सम्मान रहा है। भले ही वे हर रस्म का पूरा अर्थ न जानती हों, लेकिन मंत्रों की ध्वनि, जाप से उत्पन्न ऊर्जा और पीढ़ियों से चली आ रही इन प्राचीन रीतियों में उन्हें हमेशा कुछ गहरा और सार्थक महसूस होता रहा है। समांथा ने कहा कि जैसे-जैसे श्रीविद्या उपासक पुजारी ने हर चरण को समझाना शुरू किया, उन्हें एहसास हुआ कि यह सेरेमनी कितनी सोच-समझकर और अर्थपूर्ण ढंग से रची गई है — हर मंत्र का मकसद था, हर अर्पण का अर्थ था और हर कदम अपनी जगह पर सटीक था।
क्या है कला आवरण (श्री कल्पम) की रस्म
समांथा ने बताया कि कला आवरण, जिसे श्री कल्पम भी कहा जाता है, श्रीविद्या परंपरा की एक विशेष रस्म है। यह होने वाली मां के सातों चक्रों के ज़रिए देवी के 94 कलाओं, यानी उनके अनेक दिव्य गुणों का सम्मान करती है। इस दौरान पवित्र जल और मंत्रों के माध्यम से इन ऊर्जा केंद्रों को अनुष्ठानिक रूप से शुद्ध और सक्रिय किया जाता है, ताकि चेतना की जीवंत उपस्थिति महिला के भीतर प्रवाहित हो सके।
समांथा के लिए सबसे भावुक पल यह रहा कि इस रस्म में मां को किस नज़र से देखा जाता है। उनके अनुसार, इस अनुष्ठान में मां को स्वयं देवी के रूप में सम्मानित किया जाता है — एक पवित्र सृजनकर्ता के रूप में, जिसके ज़रिए एक नया जीवन आकार ले रहा है। यह न सिर्फ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए आशीर्वाद है, बल्कि उस महिला के लिए भी जो खुद एक नए रूप में जन्म ले रही है।
श्री चक्र यंत्रम पर बैठाई गईं समांथा
अभिषेकम की रस्म पूरी होने के बाद होने वाली मां को श्री चक्र यंत्रम के पवित्र केंद्र में बिठाया जाता है। यह यंत्र नौ आवरणों से मिलकर बना है, जो आध्यात्मिक यात्रा के अलग-अलग चरणों को दर्शाते हैं। इसके ठीक बीचोंबीच होता है बिंदु — सृष्टि के स्रोत और देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाने वाला एक बिंदु।
समांथा ने आगे बताया कि इस दौरान देवी खड्गमाला के पाठ में इन नौ आवरणों से जुड़ी देवी-शक्तियों और दिव्य ऊर्जाओं के नामों का जाप किया जाता है। यह पाठ प्रतीकात्मक रूप से बाहरी परतों से शुरू होकर केंद्र की ओर बढ़ता है, जो मन को भीतर की ओर ले जाते हुए सुरक्षा और आशीर्वाद का आह्वान करता है।
Baghpat Wire | मनोरंजन डेस्क














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