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दिवाली से पहले मेरठ में पटाखों का बड़ा अवैध जखीरा बरामद, आरोपी हिरासत में

10 sep 2026
मेरठ। दिवाली से ठीक पहले मेरठ पुलिस ने पटाखों के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए घनी आबादी वाले इलाके से खतरनाक केमिकल और विस्फोटक सामग्री का भारी जखीरा बरामद किया है। आरोप है कि यह कारोबार ग्रीन पटाखों के लाइसेंस की आड़ में चलाया जा रहा था।
कैसे हुई कार्रवाई
एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी के नेतृत्व में परतापुर, ब्रह्मपुरी, देहलीगेट और रेलवे रोड थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने केसरगंज मंडी निवासी गौरव अग्रवाल के गोदामों और दुकान पर छापा मारा। तलाशी में पटाखा निर्माण से जुड़ी भारी मात्रा में सामग्री, केमिकल और अधबने पटाखे मिले।
करीब सवा करोड़ का माल जब्त
पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 1.10 करोड़ रुपये है। इसमें कई टन संदिग्ध विस्फोटक मिश्रण के साथ टाइटेनियम, मैग्नीशियम, बेरियम कार्बोनेट, एल्युमिनियम पाउडर, बीटा ब्लू और चारकोल जैसे रसायन शामिल हैं। इसके अलावा फ्यूज वायर, पटाखा बनाने की नलियां, तैयार स्काई शॉट, आलू बम और बड़ी संख्या में अधबने पटाखे भी बरामद हुए हैं।
घनी आबादी में जखीरा कैसे पहुंचा — बड़ा सवाल
छापेमारी के बाद यह सवाल गंभीर हो गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक और रसायन घनी आबादी वाले क्षेत्र में कैसे जमा किए जा रहे थे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई या लाइसेंस की सीमाओं का उल्लंघन किया गया, इसकी जांच पुलिस और प्रशासन कर रहे हैं।
फोरेंसिक जांच और आगे की कार्रवाई
बरामद केमिकल और सामग्री के नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि केमिकल की खरीद कहां से हुई, इनका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा था, और तैयार पटाखों की सप्लाई किन-किन इलाकों में होती थी। आरोपी गौरव अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, वहीं शहर में उसके अन्य संभावित ठिकानों और गोदामों पर भी छापेमारी जारी है। घटनास्थल गोदाम और दुकान को सील कर दिया गया है।
पुलिस का कहना है कि बरामदगी का आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है, और जांच पूरी होने पर इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
निगरानी और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
दिवाली से पहले हुई इस कार्रवाई ने पटाखा कारोबार में लाइसेंस निगरानी, भंडारण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह कारोबार कब से चल रहा था और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।

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