Baghpat Wire

बागपत की ताज़ा खबरें | बड़ौत, खेकड़ा, छपरौली और उत्तर प्रदेश

दिल्ली के कूड़े के पहाड़ घटने लगे, 100 एकड़ जमीन हुई मुक्त; 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण

नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। दिल्ली की वर्षों पुरानी कूड़े के पहाड़ों की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ी प्रगति सामने आई है। ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों पर चल रहे बायोमाइनिंग और लिगेसी वेस्ट रेमेडिएशन के जरिए अब तक करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इसके साथ ही करीब 100 एकड़ जमीन को भी मुक्त कराया गया है। 

दिल्ली सरकार के अनुसार, तीनों प्रमुख लैंडफिल साइटों पर कचरे के निस्तारण का काम वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पुराने कचरे के पहाड़ों को कम करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में दोबारा ऐसे विशाल कचरा ढेर बनने से रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना भी है।

ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरा हुआ प्रोसेस

ओखला लैंडफिल साइट पर अब तक करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है। इससे लगभग 35 एकड़ जमीन मुक्त हुई है। कचरे के पहाड़ का आकार कम होने से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण

भलस्वा लैंडफिल साइट पर सबसे अधिक मात्रा में कचरे का प्रसंस्करण किया गया है। उपलब्ध सरकारी और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यहां करीब 102 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण हो चुका है और लगभग 45 एकड़ जमीन मुक्त कराई गई है। 

केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 के अंत तक अकेले भलस्वा में 99.07 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का रेमेडिएशन किया जा चुका था। सरकार ने शेष कचरे को भी समयबद्ध तरीके से हटाने का लक्ष्य रखा है। 

गाजीपुर में भी तेजी से घट रहा कूड़े का पहाड़

गाजीपुर लैंडफिल साइट पर भी बायोमाइनिंग के जरिए कचरे के निस्तारण का काम जारी है। यहां करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया है और लगभग 20 एकड़ जमीन मुक्त कराई गई है। 

इस तरह ओखला, भलस्वा और गाजीपुर तीनों साइटों को मिलाकर करीब 216 लाख मीट्रिक टन यानी 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण और लगभग 100 एकड़ जमीन का पुनरुद्धार हुआ है।

सिर्फ कचरा हटाना नहीं, दोबारा पहाड़ बनने से रोकना भी लक्ष्य

दिल्ली में लैंडफिल साइटों की समस्या दशकों पुरानी है। सरकार अब पुराने कचरे को हटाने के साथ-साथ रोजाना पैदा होने वाले नए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी जोर दे रही है। इसके लिए नई वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। 

बायोमाइनिंग प्रक्रिया में पुराने कचरे को निकालकर उसकी छंटाई और प्रोसेसिंग की जाती है। इसमें उपयोगी, रिसाइकिल होने वाली और अन्य सामग्री को अलग किया जाता है। इससे लैंडफिल का आकार घटाने और जमीन को दोबारा उपयोग में लाने में मदद मिलती है।

दिल्ली के पर्यावरण के लिए अहम कदम

कूड़े के पहाड़ों का कम होना केवल जमीन खाली कराने तक सीमित नहीं है। लंबे समय से इन लैंडफिल साइटों से दुर्गंध, धूल, प्रदूषण और आग जैसी समस्याओं को लेकर आसपास के इलाकों में चिंता रही है। ऐसे में लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण दिल्ली के पर्यावरण और लोगों के जीवन की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि लैंडफिल साइटों पर जमा पुराने कचरे को हटाने के साथ भविष्य में कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। इस दिशा में लगातार निगरानी, नई प्रसंस्करण क्षमता और समयबद्ध कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, एक तथ्यात्मक सुधार जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टों में 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस होने और 100 एकड़ जमीन मुक्त होने की पुष्टि है; “सिर्फ 1.5 साल में” वाला समय-आकलन इन स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं होता। इसलिए प्रकाशित खबर में इसे तथ्य के रूप में लिखने से बचना बेहतर रहेगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *