नई दिल्ली 26 अगस्त।। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकियों को भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने की स्वीकृति दे दी है। इसका उद्देश्य इन मिसाइल प्रणालियों का स्वदेश में उत्पादन बढ़ाना और घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी को मजबूत करना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से भारतीय कंपनियां निर्धारित योग्यताओं, प्रमाणन और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करते हुए इन तकनीकों का स्वदेशी उत्पादन कर सकेंगी। इससे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी और घरेलू उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
घरेलू रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का यह फैसला रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के लिए विदेशी निर्भरता कम करने तथा देश में ही अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीक हस्तांतरण के जरिए घरेलू कंपनियों को DRDO द्वारा विकसित प्रणालियों के उत्पादन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
इस कदम से भारतीय रक्षा उद्योग के लिए तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा।
प्रमाणन और नियामकीय मानकों का पालन जरूरी
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बाद उद्योगों को निर्धारित तकनीकी योग्यताओं, प्रमाणन और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करना होगा। यानी केवल तकनीक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उत्पादन के दौरान निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को भी पूरा करना आवश्यक होगा।
सरकार का जोर रक्षा क्षेत्र में ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करने पर है, जिसमें भारतीय उद्योग अधिक सक्रिय रूप से रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास में भाग ले सकें।
आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की ओर कदम
DRDO की विकसित तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाने का यह निर्णय देश के रक्षा उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे घरेलू कंपनियों को स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्माण का अनुभव मिलेगा और भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार लगातार रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। मिसाइल तकनीक का भारतीय उद्योग को हस्तांतरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।














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