शिलांग, 22 अगस्त। मेघालय में विपक्षी वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी (VPP) के विधायक एडलबर्ट नोंग्रम ने विधानसभा अध्यक्ष थॉमस संगमा से ‘वंदे मातरम्’ के दो से अधिक पद गाने को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर अपने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
नोंग्रम ने विधानसभा के आगामी सत्र में ‘कार्य-संचालन और कामकाज के नियमों’ के नियम 115 के तहत पेश किए गए प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है। मेघालय विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 24 अगस्त से शुरू होने वाला है।
विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर उठाए सवाल
विधानसभा के उप सचिव राजा खारपुरी ने विधायक एडलबर्ट नोंग्रम को एक पत्र के माध्यम से बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। पत्र में इसके लिए ‘कार्य-संचालन और कामकाज के नियमों’ के नियम 117(जी) का हवाला दिया गया है।
पत्र में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का भी उल्लेख किया गया है। उप सचिव के अनुसार, संशोधित कानून के तहत राष्ट्रगीत के सभी छह पद गाना अनिवार्य किया गया है।
हालांकि, VPP विधायक नोंग्रम ने इस व्याख्या पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि नियम 117(जी) उनके प्रस्ताव पर लागू नहीं होता, क्योंकि प्रस्ताव का संबंध राज्य सरकार की जिम्मेदारियों और नागरिकों के अधिकारों से भी है।
नोंग्रम ने मौलिक अधिकारों का दिया हवाला
नोंग्रम ने कहा कि भले ही ‘वंदे मातरम्’ गाने से संबंधित निर्देश केंद्र सरकार की ओर से आए हों, लेकिन राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों की चिंताओं का समाधान करे और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करे।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।
नोंग्रम ने गुरुवार को यूनीवार्ता से कहा कि इसी आधार पर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की जानी चाहिए और उनके प्रस्ताव को केवल नियमों के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
कानून में सभी छह पद अनिवार्य होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं: नोंग्रम
VPP विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को बताया कि उन्होंने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का अध्ययन किया है। उनका दावा है कि संशोधित कानून की धारा तीन में कहीं भी यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पद गाना अनिवार्य है।
नोंग्रम ने कहा कि कानून में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पदों को ही ‘राष्ट्रीय गीत’ माना जाएगा।
उन्होंने तर्क दिया कि केवल कानून में संशोधन किए जाने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पदों का गायन अनिवार्य कर दिया गया है।
मेघालय की धार्मिक और सामाजिक परिस्थितियों का भी जिक्र
नोंग्रम ने कहा कि सभी छह पदों को गाने का मुद्दा मेघालय से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उन्होंने राज्य की धार्मिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग ईसाई धर्म को मानते हैं और कुछ लोगों की धार्मिक मान्यताओं के कारण दो से अधिक पद गाने को लेकर आपत्ति हो सकती है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर संवेदनशील तरीके से विचार किया जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पदों का समर्थन
VPP विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इसके पहले दो पदों का समर्थन करते हैं, लेकिन पूरे संस्करण को लेकर उनकी आपत्ति है।
नोंग्रम ने कहा, “मैं राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण के पूरी तरह खिलाफ हूँ, लेकिन मैं पहले दो पदों का पूरी तरह समर्थन करता हूँ।”
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि उनके प्रस्ताव को दोबारा देखा जाए और आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर चर्चा का अवसर दिया जाए।
24 अगस्त से शुरू होगा विधानसभा सत्र
मेघालय विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 24 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर VPP विधायक की मांग से विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस की संभावना बढ़ गई है।
अब निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के अगले निर्णय और इस मुद्दे पर सदन में होने वाली संभावित चर्चा पर रहेंगी।














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