जालौन, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश के जालौन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अनुश्रवण समिति ने शुक्रवार को वृद्धाश्रम, आश्रय गृह और जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। न्यायिक अधिकारियों ने यहां रह रहे आश्रितों और बंदियों के रहन-सहन, खानपान, चिकित्सा, स्वच्छता, सुरक्षा समेत अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सबसे पहले राठ रोड स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा स्वैच्छिक संस्था शिवा ग्रामोत्थान सेवा संस्था के सहयोग से संचालित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 126 संवासी उपस्थित मिले। पंजिका के अनुसार रात्रिकालीन कर्मचारियों और स्टाफ नर्स अर्चना को छोड़कर सभी कर्मचारी उपस्थित थे। बताया गया कि स्टाफ नर्स संवासियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज गई थीं।
वृद्धाश्रम में संवासियों से भोजन व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने निर्धारित मेन्यू के अनुसार समय से भोजन मिलने की बात बताई। मेडिकल डिस्पेंसरी में आवश्यक दवाओं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाएं भी देखी गईं।
इसके बाद न्यायिक अधिकारियों ने जिला कारागार उरई की विभिन्न बैरकों और पाकशाला का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बंदियों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मनाली चन्द्रा ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे बंदियों की सूची तत्काल प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाए, जिनकी जमानत मंजूर हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर न होने के कारण वे अभी रिहा नहीं हो सके हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी कराकर बंदियों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाए।
इसके बाद समिति ने लहरियापुरवा स्थित आश्रय गृह का निरीक्षण किया। यहां मेडिकल डिस्पेंसरी में दवाएं व्यवस्थित मिलीं। निरीक्षण के दिन आश्रय गृह में कोई आश्रित पंजीकृत नहीं मिला।
निरीक्षण समिति में अपर जिला जज प्रथम सतीश चन्द्र द्विवेदी, सीजेएम अभिषेक खरे और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा शामिल रहीं।














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