उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए नई नियमावली लागू। डायनेमिक किराया बेस फेयर से 50% तक, ड्राइवर सत्यापन और यात्रियों के बीमा का प्रावधान।

लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 लागू कर दी है। इसके साथ ही ‘यूपी माय फ्लीट’ एग्रीगेटर पोर्टल भी शुरू किया गया है। नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के कल्याण, किराये में पारदर्शिता, वाहन प्रदूषण की निगरानी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया गया है।

सरकार ने 22 मई 2026 की अधिसूचना के माध्यम से नियमावली लागू की है। इसके दायरे में ऐप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने वाले एग्रीगेटर के साथ-साथ उत्पाद, कूरियर, पैकेज और पार्सल की डिलीवरी कराने वाली लॉजिस्टिक सेवाएं भी शामिल होंगी।

एग्रीगेटर के लिए पांच लाख रुपये लाइसेंस शुल्क

नई व्यवस्था के तहत एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस शुल्क पांच लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा वाहन बेड़े के आकार के आधार पर सुरक्षा जमा राशि तय की गई है।

● 100 बस या 1,000 अन्य मोटरयान तक के बेड़े के लिए 10 लाख रुपये।

● 1,000 बस या 10,000 अन्य मोटरयान तक के बेड़े के लिए 25 लाख रुपये।

● इससे बड़े बेड़े के लिए 50 लाख रुपये की सुरक्षा राशि।

सरकार के अनुसार सुरक्षा जमा राशि से लाइसेंस की शर्तों और मोटर वाहन कानूनों के उल्लंघन की स्थिति में एग्रीगेटर की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

ड्राइवरों का होगा सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण

नई नियमावली में एग्रीगेटर से जुड़े चालकों का चरित्र और पुलिस सत्यापन कराने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी कराया जाएगा। चालकों को समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।

प्रत्येक यात्री के लिए बीमा कराना एग्रीगेटर के लिए अनिवार्य होगा। वहीं चालकों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

डायनेमिक प्राइसिंग पर भी सीमा

ऐप आधारित कैब और अन्य सेवाओं में बढ़ती मांग के दौरान किराये में होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर नियंत्रण के लिए डायनेमिक प्राइसिंग की सीमा तय की गई है। एग्रीगेटर निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत तक किराया ले सकेगा।

इसके अलावा बुकिंग स्वीकार करने के बाद निर्धारित समय तक चालक द्वारा यात्री को पिकअप नहीं करने पर 100 रुपये के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। इस पेनाल्टी से मिलने वाला लाभ यात्री को अगली ट्रिप में दिए जाने की व्यवस्था होगी।

शिकायतों के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर

प्रत्येक एग्रीगेटर को शिकायतों के निस्तारण के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। यात्री किराये, बुकिंग, चालक या सेवा से संबंधित शिकायतें निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से दर्ज करा सकेंगे।

नियमों और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर दंड का भी प्रावधान किया गया है।

NCR में प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर

नई व्यवस्था में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वाहन प्रदूषण की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है। एग्रीगेटर के बेड़े में शामिल वाहनों की पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाएगी।

सरकार ने फ्लीट में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने और पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

पोर्टल पर 3.15 लाख से अधिक वाहन ऑनबोर्ड

‘यूपी माय फ्लीट’ पोर्टल को एग्रीगेटर सेवाओं की निगरानी और प्रबंधन के डिजिटल माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में NCR क्षेत्र के दो एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन पोर्टल पर ऑनबोर्ड हैं।

डिजिटल पोर्टल के माध्यम से एग्रीगेटर सेवाओं से जुड़े वाहनों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार होगा। इससे नियमों के अनुपालन, वाहन प्रदूषण की निगरानी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में फ्लीट के संक्रमण को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

नई नियमावली से सरकार और परिवहन विभाग को एग्रीगेटर कंपनियों की निगरानी के लिए स्पष्ट ढांचा मिलेगा। कंपनियों को लाइसेंस, शुल्क और संचालन मानकों को लेकर स्पष्टता मिलेगी, जबकि चालकों को बीमा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

वहीं यात्रियों को सत्यापित चालक, बीमा सुरक्षा, किराये की सीमा, शिकायत निवारण और बुकिंग के बाद पिकअप नहीं होने की स्थिति में राहत जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

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