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ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट से अपील, TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक के खिलाफ जल्द सुनवाई की मांग

नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC नेता ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की।

सिब्बल ने अदालत के सामने चुनाव आयोग के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसके तहत पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच विवाद के चलते ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ (Flowers & Grass) चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम तौर पर रोक लगाई गई है। उन्होंने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की।

सिब्बल ने अदालत में कहा कि चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी करने के दौरान ही चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया। उन्होंने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग रखी। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि विरोधी पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। अदालत ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की कोशिश करने की बात कही।

चुनाव आयोग के आदेश को दी गई चुनौती

ममता बनर्जी की याचिका चुनाव आयोग के 17 सितंबर 2026 के अंतरिम आदेश के खिलाफ है। आयोग ने TMC के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों को इसका इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह व्यवस्था पार्टी के संगठन और पहचान को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद के अंतिम निपटारे तक लागू रहने के लिए की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि में TMC के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर विवाद है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने का निर्देश दिया था।

दोनों गुटों को मिले अलग नाम और चुनाव चिह्न

आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया।

यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल में होने वाले 6 अक्टूबर के विधानसभा उपचुनावों की वजह से भी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न की व्यवस्था की है, ताकि उपचुनाव के दौरान दोनों पक्ष अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ सकें।

अब ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर नजर है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सामने आने के बाद इस विवाद में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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