प्रकाशन तिथि: 28 सितंबर 2026 | Baghpat Wire
पटना: बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बिहार विधान परिषद के सभापति पद से त्यागपत्र देने के साथ एक वक्तव्य जारी कर अपनी राजनीतिक यात्रा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में निभाई गई जिम्मेदारियों और विधान परिषद में करीब 33 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख किया। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में सहयोग देने वाले पार्टी नेतृत्व, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, तीनों पदों पर काबिज होने के कारण सभापति पद को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि विधान परिषद के सभापति का पद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के हिस्से में जा सकता है। अब सिंह के इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है।
भाजपा कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई थी राजनीतिक यात्रा
अवधेश नारायण सिंह ने अपने इस्तीफे के साथ जारी वक्तव्य में अपनी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने राज्य में पार्टी संगठन के विभिन्न पदों पर काम किया और संगठन के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का भरपूर स्नेह और सहयोग मिला। संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियों को निभाने के दौरान मिले सहयोग के लिए उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।
सिंह ने अपने वक्तव्य में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के संगठन और सरकार से जुड़े सभी नेताओं के प्रति भी आभार जताया।
करीब 33 वर्षों तक विधान परिषद में निभाई जिम्मेदारी
अवधेश नारायण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ बिहार विधान परिषद में करीब 33 वर्षों के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। इतने लंबे समय तक सदन से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इस लंबी राजनीतिक यात्रा में उन्हें अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं का सहयोग मिला। उन्होंने अपने अनुभवों और राजनीतिक सफर को याद करते हुए उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता जताई, जिन्होंने अलग-अलग समय पर उनका साथ दिया।
सिंह ने सभापति के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान मिले सहयोग को भी याद किया। उनके इस्तीफे के साथ जारी वक्तव्य में राजनीतिक जीवन के विभिन्न पड़ावों और संगठन के प्रति उनके योगदान का उल्लेख प्रमुखता से किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के प्रति जताया आभार
अवधेश नारायण सिंह ने अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान उन्हें केंद्र और राज्य के नेताओं का सहयोग मिलता रहा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में मिले समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेतृत्व के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद किया।
नीतीश कुमार के सहयोग को किया याद
अवधेश नारायण सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में उन्हें चार बार बिहार विधान परिषद का सभापति बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
सिंह के अनुसार, सभापति के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान उन्हें नीतीश कुमार का पूरा स्नेह और सहयोग मिला। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में पूर्व मुख्यमंत्री के योगदान को याद करते हुए उनके प्रति आभार जताया।
इसके साथ ही उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। अपने वक्तव्य में सिंह ने दोनों नेताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राजनीतिक जीवन में मिले सहयोग का उल्लेख किया।
बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस्तीफा
बिहार में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बीच अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, तीनों पदों पर होने के कारण सभापति पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही थीं।
इसी बीच यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जा सकता है। बिहार में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता में भागीदारी के समीकरणों को देखते हुए इस पद को लेकर चर्चाएं तेज थीं।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को इसी राजनीतिक घटनाक्रम की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की परिस्थितियों और सभापति पद के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सभापति पद पर आगे क्या होगा?
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। जदयू को यह पद मिलने की अटकलों के बीच अब सबकी नजरें अगले राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेंगी।
सिंह ने अपने इस्तीफे के वक्तव्य में अपने राजनीतिक सफर और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने भाजपा में कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत करने से लेकर विधान परिषद में करीब 33 वर्षों तक काम करने और चार बार सभापति बनने तक की यात्रा का उल्लेख किया।
बिहार में सत्ता के भीतर बदलते समीकरणों के बीच उनका इस्तीफा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब यह देखना होगा कि विधान परिषद के सभापति पद को लेकर आगे क्या फैसला होता है और क्या यह पद जदयू के हिस्से में जाता है।
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