बागपत, 14 सितंबर। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में लंपी बीमारी से गोवंशों की लगातार मौत होने के दावों के बीच पशुपालन विभाग के आंकड़ों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया है। पशुपालकों के अनुसार जिले के करीब 40 गांवों में एक हजार से अधिक गोवंश लंपी की चपेट में आ चुके हैं और 148 गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड में अब तक सिर्फ एक गोवंश की मौत और 238 के बीमार होने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
चमरावल गांव के पशुपालक रामभूल त्यागी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उनके पांच गोवंश लंपी बीमारी की चपेट में आ गए थे। इनमें से दो की मौत हो चुकी है। गांव के अन्य किसानों के चार गोवंश भी बीमारी के कारण मर चुके हैं। इसी तरह गौना गांव के शीशपाल यादव के दो गोवंश की भी लंपी से मौत होने की बात सामने आई है।
40 गांवों तक पहुंची बीमारी
पशुपालकों के अनुसार जिले में करीब दो महीने पहले लंपी बीमारी ने गोवंशों को अपनी चपेट में लेना शुरू किया था। अब तक यह बीमारी फैजपुर निनाना, सिसाना, बड़ौत, लुहारी, मलकपुर, सिनौली, लहचौड़ा, मुकारी, चमरावल, सरूरपुर कलां, सिंगौली तगा, सरफाबाद और दोघट सहित करीब 40 गांवों तक पहुंच चुकी है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार इन गांवों में एक हजार से अधिक गोवंश बीमार हुए हैं और करीब 148 गोवंश की मौत होने का दावा किया जा रहा है।
विभागीय रिकॉर्ड में सिर्फ एक मौत
इसके विपरीत पशुपालन विभाग ने शासन को अब तक लंपी बीमारी से एक गोवंश की मौत और 238 गोवंश के बीमार होने की रिपोर्ट भेजी है। पशुपालकों का आरोप है कि उन्होंने पशुओं के बीमार होने और मौत की सूचना पशुपालन विभाग को दी, लेकिन उसे विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
पशुपालकों का कहना है कि उन्होंने करीब 80-80 हजार रुपये में गोवंश खरीदे थे। बीमारी की चपेट में आने के बाद उनके उपचार पर करीब 20-20 हजार रुपये तक खर्च किए गए, लेकिन पशुओं को बचाया नहीं जा सका। उनका आरोप है कि मौत के बाद उन्हें किसी तरह का मुआवजा भी नहीं मिला।
इन गांवों में गोवंश की मौत का दावा
स्थानीय पशुपालकों से मिली जानकारी के अनुसार फैजपुर निनाना में 15, सरूरपुर कलां में 20, सिसाना में पांच, सरफाबाद में 15, गढ़ी कलंजरी में पांच, सिंगौली तगा में पांच, लहचौड़ा में आठ, रटौल में पांच, चमरावल में पांच, मुकारी में आठ, सिनौली में आठ, लुहारी में आठ और मलकपुर में पांच गोवंश की मौत होने का दावा किया गया है। इसके अलावा भी कई अन्य गांवों में गोवंश की मौत की जानकारी सामने आई है।
99,800 गोवंश के टीकाकरण का दावा
जिले में कुल 1,09,992 गोवंश बताए गए हैं। लंपी बीमारी के बाद टीकाकरण के लिए जिले में 99,800 वैक्सीन उपलब्ध कराई गई थीं। पशुपालन विभाग की ओर से सभी गोवंशों को टीका लगाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि कई पशुपालकों का कहना है कि उनके यहां अभी तक गोवंश का टीकाकरण नहीं हुआ है।
क्या कहते हैं पशुपालक
गढ़ी कलंजरी निवासी आशेराम ने बताया कि गांव में लंपी बीमारी से पांच गोवंश की मौत हो चुकी है और 30 से अधिक गोवंश बीमार हैं। उनका कहना है कि पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के नहीं पहुंचने के कारण निजी चिकित्सकों से पशुओं का उपचार कराना पड़ रहा है।
सरफाबाद निवासी डेविड के अनुसार, गांव में लंपी से तीन गोवंश की मौत हो चुकी है और 35 से अधिक गोवंश बीमारी की चपेट में हैं। उन्होंने दावा किया कि अभी तक उनके गांव में पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है।
विभाग का दावा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बागपत डॉ. रमेश चंद्र यादव ने कहा कि विभागीय जानकारी के अनुसार लंपी बीमारी से जिले में सिर्फ एक गोवंश की मौत हुई है और 238 गोवंश बीमार हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पशुपालक ने गोवंश की मौत की सूचना विभाग को नहीं दी है। जहां भी लंपी से गोवंश के बीमार होने की सूचना मिलती है, वहां टीम भेजकर उपचार कराया जाता है।