बरेली, 19 अगस्त। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भोजीपुरा पुलिस ने आयुष्मान भारत योजना के नाम पर कथित फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कथित फर्जी आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड की प्रतियां, मोबाइल फोन तथा नकदी बरामद की है। मामले में कुछ निजी अस्पताल कर्मियों की कथित भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) मुकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, आरोपी अपात्र लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। आरोप है कि इसके लिए आधार और राशन कार्ड में नाम-पते से संबंधित बदलाव कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। प्रत्येक व्यक्ति से कथित तौर पर 35 से 40 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
एम्स में कार्ड की जांच के दौरान सामने आया मामला
पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा नवाबगंज क्षेत्र निवासी हरप्रसाद की शिकायत के बाद हुआ। वह अपनी पुत्री के इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स पहुंचे थे। आरोप है कि आबिद और उसके साथियों ने उनसे 47 हजार रुपये लेकर आधार कार्ड में बदलाव कर आयुष्मान कार्ड बनवाया था।
अस्पताल में कार्ड की जांच के दौरान कथित फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसके बाद मरीज का इलाज नहीं हो सका। इसके बाद पीड़ित की शिकायत पर भोजीपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
आधार और राशन कार्ड में करते थे कथित हेरफेर
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे अपात्र लोगों से आधार और राशन कार्ड लेकर उनमें नाम और पते से संबंधित बदलाव करते थे। इसके बाद उनके नाम से आयुष्मान कार्ड बनवाए जाते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन कथित फर्जी आयुष्मान कार्डों का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किन-किन अस्पतालों में किया गया और इनके माध्यम से सरकारी योजना के तहत कितनी राशि का भुगतान हुआ।
अस्पताल कर्मियों की भूमिका की भी जांच
पुलिस के अनुसार मामला केवल कथित फर्जी कार्ड बनाने तक सीमित नहीं है। जांच में आरोप है कि मरीजों से पैसे लेने के बाद उन्हें आयुष्मान योजना के तहत उपचार दिलाया जाता था और सरकारी भुगतान का लाभ भी लिया जाता था। इसी आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 भी जोड़ी गई है।
कुछ निजी अस्पताल कर्मियों की कथित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। प्राथमिकी में नितिन, नरेश सहित कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों का उल्लेख है। गिरफ्तार आरोपियों ने अस्पताल कर्मियों की कथित मदद से अपात्र लोगों का इलाज कराने का दावा किया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पांच आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद
पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले से जुड़े कुछ आरोपी राममूर्ति अस्पताल के पीछे प्रहलादपुर मार्ग स्थित एक ट्यूबवेल के पास मौजूद हैं। सूचना के आधार पर बुधवार सुबह पुलिस ने छापेमारी कर आबिद, सलमान, अरमान, अफरोज और देशरत्न को गिरफ्तार कर लिया।
तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, 13 कथित कूटरचित आयुष्मान कार्ड, छह कथित कूटरचित आधार कार्ड, राशन कार्ड की 22 कथित कूटरचित प्रतियां और 2,700 रुपये नकद बरामद किए गए।
नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने अब तक कितने लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाए, उनसे कितनी रकम वसूली गई, किन-किन अस्पतालों में कार्ड का इस्तेमाल हुआ और योजना के तहत कितनी सरकारी धनराशि का भुगतान कराया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने मुरादाबाद निवासी नरेश नामक व्यक्ति का भी उल्लेख किया है। उसके संभल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत होने का दावा किया गया है। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है।
आबिद पर पहले भी मुकदमे दर्ज
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी आबिद के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध वर्ष 2021 में प्रेमनगर थाने में चोरी और धोखाधड़ी तथा वर्ष 2022 में भोजीपुरा थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।














Leave a Reply