6 सितंबर 2026 | नई दिल्ली
भारत में होने वाली जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम अधिसूचना जारी की है। इसके तहत गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनगणना की प्रक्रिया सामान्य समय से पहले शुरू की जाएगी। इन क्षेत्रों में आबादी की गिनती का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच कराया जाएगा।
सरकार के इस फैसले के पीछे इन राज्यों में संभावित चुनावों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अगले वर्ष की शुरुआत में इन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम और जनगणना की प्रक्रिया एक-दूसरे से प्रभावित न हों, इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में आबादी की गणना पहले कराने का निर्णय लिया गया है।
चुनावी राज्यों के लिए अलग समयसीमा
जनगणना की सामान्य प्रक्रिया और चुनावी गतिविधियों के बीच संभावित टकराव को देखते हुए सरकार ने चार राज्यों के कुछ हिस्सों के लिए अलग समयसीमा तय की है। अधिसूचना के अनुसार इन क्षेत्रों में 1 दिसंबर से शुरू होने वाली प्रक्रिया 4 जनवरी 2027 तक चलेगी।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह फैसला खास महत्व रखता है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी के साथ-साथ व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत होगी। जनगणना के दौरान घरों, परिवारों और आबादी से संबंधित जरूरी आंकड़े जुटाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल आगे सरकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों में किया जाता है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
सरकार की अधिसूचना सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार की योजना और तैयारियों पर निशाना साधते हुए इसे खराब प्लानिंग का उदाहरण बताया है।
कांग्रेस का कहना है कि जनगणना जैसी व्यापक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया को लेकर पहले से स्पष्ट योजना बनाई जानी चाहिए थी। पार्टी ने सरकार के फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि चुनावों को ध्यान में रखकर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रक्रिया का समय बदलना प्रशासनिक चुनौती पैदा कर सकता है।
जयराम रमेश ने सरकार पर जनगणना की तैयारियों में देरी और बेहतर योजना के अभाव का आरोप लगाया। कांग्रेस का यह भी तर्क है कि जनगणना देश की नीतिगत व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके संचालन में पारदर्शिता और स्पष्टता जरूरी है।
जनगणना का क्या है महत्व?
भारत में जनगणना केवल आबादी की संख्या जानने की प्रक्रिया नहीं है। इसके माध्यम से देश की जनसंख्या, परिवारों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित कई महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाते हैं। इन आंकड़ों का इस्तेमाल सरकार विभिन्न योजनाओं की जरूरत तय करने, संसाधनों के वितरण और भविष्य की नीतियां बनाने में करती है।
जनगणना से मिलने वाला डेटा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इसकी प्रक्रिया को बड़े स्तर पर प्रशासनिक अभ्यास के रूप में देखा जाता है।
आगे क्या होगा?
चार राज्यों के चिन्हित क्षेत्रों में दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनगणना 2027 की तैयारियां और तेज होने की उम्मीद है। प्रशासन के सामने बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण और आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन जैसी चुनौतियां रहेंगी।
वहीं, सरकार के फैसले पर विपक्ष की आपत्तियों के बाद जनगणना की समयसीमा और इसकी तैयारियां राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन सकती हैं। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया से जुड़े और दिशा-निर्देश सामने आने की संभावना है।














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