प्रकाशन तिथि: 29 सितंबर 2026 | Baghpat Wire
नई दिल्ली: अगर आपने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है और लंबे समय से अपना ई-चालान जमा नहीं किया है, तो आने वाले समय में आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लंबित ई-चालानों की भारी-भरकम राशि की वसूली के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई सख्त उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया है। इनमें बकाया चालान को बिजली के बिल से जोड़ने, ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने और वाहन जब्त करने जैसे उपाय शामिल हैं।
28 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने ई-चालान की वसूली से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। अदालत को बताया गया कि देशभर में लगभग 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान लंबित हैं। इनमें से करीब 25,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। शेष राशि की वसूली के लिए अदालत ने प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ये सुझाव फिलहाल अंतिम आदेश या देशभर में लागू होने वाले नए कानून नहीं हैं। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि ई-चालान का भुगतान नहीं करने पर किसी वाहन चालक की बिजली काट दी जाएगी।
45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान लंबित
देश में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ई-चालान जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक समय पर जुर्माना जमा नहीं कर रहे हैं। इससे लंबित चालानों की राशि लगातार एक बड़ी समस्या बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान की राशि लंबित है। इसमें से करीब 25,000 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
अदालत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों से जुर्माने की वसूली की जाए।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने इस बात पर जोर दिया कि वसूली के लिए ऐसे व्यावहारिक उपाय तलाशने होंगे, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके।
बिजली के बिल से जोड़ा जा सकता है ई-चालान
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सुझाव लंबित ई-चालान को बिजली के बिल से जोड़ने का रहा। अदालत ने कहा कि जो लोग ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं कर रहे हैं, उनके बकाया जुर्माने को बिजली के बिल में जोड़ने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव के पीछे उद्देश्य यह है कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर बिजली कनेक्शन काटे जाने की आशंका के कारण वाहन मालिक अपना लंबित चालान जमा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
हालांकि, यह अभी केवल अदालत का सुझाव है। राज्यों को इस संबंध में व्यावहारिक और कानूनी पहलुओं पर विचार करना होगा। फिलहाल ऐसा कोई देशव्यापी नियम लागू नहीं हुआ है, जिसके तहत ई-चालान का भुगतान नहीं करने पर बिजली कनेक्शन काटा जा सके।
ड्राइविंग लाइसेंस भी हो सकता है निलंबित
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सख्त उपायों पर भी विचार करने का सुझाव दिया है।
अदालत के सामने यह प्रस्ताव आया कि जिन वाहन चालकों के चालान लंबे समय से बकाया हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने या पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यदि ऐसे उपायों को संबंधित नियमों के तहत लागू किया जाता है, तो बार-बार चालान का भुगतान नहीं करने वाले वाहन चालकों को वाहन चलाने से संबंधित प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल इन उपायों को लेकर कोई नया देशव्यापी नियम लागू नहीं हुआ है।
वाहन की आरसी और फिटनेस सर्टिफिकेट पर भी लग सकती है रोक
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए वाहन से संबंधित विभिन्न सेवाओं को प्रतिबंधित करने के सुझाव भी दिए हैं।
इनमें वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का नवीनीकरण रोकना, डुप्लीकेट आरसी जारी नहीं करना और वाहन के मालिकाना हक के हस्तांतरण पर रोक लगाने जैसे उपाय शामिल हैं।
इसके अलावा, जिन वाहनों पर चालान बकाया है, उनके फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी करने पर भी रोक लगाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन मालिक अपने लंबित चालानों का भुगतान किए बिना परिवहन विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ न उठा सकें।
बकाया चालान वाले वाहन हो सकते हैं ब्लैकलिस्ट
अदालत ने परिवहन पोर्टल पर लंबित चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने का सुझाव भी दिया है।
यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है, तो बकाया चालान वाले वाहनों की पहचान करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना आसान हो सकता है।
इसके साथ ही, अदालत ने रैंडम वाहन चेकिंग के दौरान पुराने लंबित चालान वाले वाहनों की जांच करने और आवश्यक स्थिति में उन्हें जब्त करने जैसे उपायों पर भी विचार करने को कहा है।
इस व्यवस्था के तहत सड़क पर जांच के दौरान ऐसे वाहनों की पहचान की जा सकती है, जिनके चालान लंबे समय से जमा नहीं किए गए हैं।
हालांकि, वाहन जब्त करने की कार्रवाई लागू कानूनी प्रावधानों और संबंधित अधिकारियों की शक्तियों के अनुरूप ही की जा सकेगी।
अभी लागू नहीं हुआ कोई नया नियम
सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के बाद वाहन चालकों के बीच यह सवाल उठ सकता है कि क्या अब ई-चालान नहीं भरने पर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा या ड्राइविंग लाइसेंस रद्द हो जाएगा।
इस संबंध में महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने फिलहाल इन उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया है। इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने का कोई अंतिम देशव्यापी आदेश जारी नहीं किया गया है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सुझावों के आधार पर वसूली की व्यवस्था तैयार करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करना होगा।
इसलिए वाहन मालिकों को यह समझना चाहिए कि बिजली कनेक्शन काटने या अन्य सेवाओं पर रोक लगाने की संभावना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है, न कि लागू हो चुके नियम के रूप में।
वाहन चालकों के लिए क्या है जरूरी?
लंबित ई-चालानों की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि अदालत इस मामले में प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दे रही है।
वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन पर जारी ई-चालानों की स्थिति की जांच करें और यदि कोई चालान लंबित है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसका निपटारा करें।
यदि किसी चालान को लेकर विवाद है, तो वाहन मालिक संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे चुनौती दे सकते हैं।
फिलहाल बिजली कनेक्शन काटने या लाइसेंस निलंबित करने जैसे उपाय लागू नहीं हुए हैं। हालांकि, भविष्य में राज्यों द्वारा नई व्यवस्था बनाए जाने पर लंबित चालानों की वसूली से संबंधित नियमों में बदलाव हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने करीब 45,000 करोड़ रुपये के लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए सख्त कदमों पर विचार करने का सुझाव दिया है। बिजली बिल से चालान जोड़ने से लेकर वाहन जब्त करने तक के प्रस्तावों पर चर्चा हुई है, लेकिन इन्हें अभी लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए।
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