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Mirzapur: The Movie Review: बड़े पर्दे पर लौटा ‘मिर्जापुर’ का भौकाल, रवि किशन की एंट्री ने बढ़ाया रोमांच

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026। लंबे इंतजार के बाद ‘मिर्जापुर’ की दुनिया बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रसिका दुग्गल जैसे पुराने कलाकारों के साथ रवि किशन की नई एंट्री कहानी को नया मोड़ देती है। 

फिल्म उन दर्शकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ती है जो ‘मिर्जापुर’ की पिछली कहानी और किरदारों से पहले से परिचित हैं। फिल्म में किरदारों का लंबा परिचय देने के बजाय सीधे कहानी को आगे बढ़ाया गया है। यही वजह है कि पुराने प्रशंसकों के लिए कई दृश्य और आपसी टकराव किसी पुराने परिचित खेल की तरह महसूस होते हैं। 

कलीन भैया के सामने नई चुनौती

कहानी में कलीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी अपने साम्राज्य को आगे बढ़ाने के लिए नए सप्लायर की तलाश में हैं। इसी दौरान राजस्थान से बप्पन यादव की एंट्री होती है, जिसका किरदार रवि किशन ने निभाया है।

बप्पन अपने बिजनेस पार्टनर भैरव सिंह से धोखा करने के बाद फरार है। उसके साथ उसकी प्रेमिका और डांसर मुमताज तथा सहयोगी बिरजू भी हैं। उनके पास चोरी की गई ड्रग्स की खेप है। बप्पन कलीन भैया के सामने बिजनेस का प्रस्ताव रखता है, लेकिन उसका असली मकसद सिर्फ सप्लायर बनना नहीं है। उसकी नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है। 

मुन्ना और गुड्डू की पुरानी दुश्मनी बरकरार

फिल्म में मुन्ना त्रिपाठी के रूप में दिव्येंदु और गुड्डू पंडित के रूप में अली फजल की पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी देखने को मिलती है। मुन्ना का गुस्सा, उसका आत्मविश्वास और खतरनाक अंदाज एक बार फिर कहानी में जान डालता है।

पंकज त्रिपाठी कलीन भैया के किरदार में अपनी वही शांत लेकिन खतरनाक मौजूदगी बनाए रखते हैं। वहीं अली फजल गुड्डू के किरदार में आसानी से वापस लौटते हैं। 

रवि किशन बने फिल्म की बड़ी ताकत

रवि किशन का बप्पन यादव फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। उनका किरदार कहानी में सिर्फ नया चेहरा नहीं जोड़ता, बल्कि मिर्जापुर की सत्ता के खेल को और बड़ा बनाता है।

रवि किशन के अभिनय और उनके किरदार में मौजूद डार्क ह्यूमर को समीक्षकों ने खास तौर पर सराहा है। 

रसिका दुग्गल का बीना वाला अंदाज भी प्रभावी

रसिका दुग्गल एक बार फिर बीना त्रिपाठी के किरदार में नजर आती हैं। इस बार उनके किरदार को कहानी में ज्यादा महत्व मिलता है। बीना अपनी समझदारी और रणनीति के जरिए सत्ता के खेल में अपनी जगह बनाए रखती हैं और फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों में प्रभाव छोड़ती हैं। 

कहानी की रफ्तार पर उठे सवाल

फिल्म की शुरुआत दर्शकों को बांधे रखती है, लेकिन दूसरे हिस्से में कहानी कुछ जगह धीमी पड़ती है। लगभग 3 घंटे 17 मिनट की लंबाई के कारण कुछ दृश्यों में फिल्म लंबी महसूस होती है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी फिल्म को 3/5 की रेटिंग देते हुए इसकी लंबाई और दूसरे हिस्से की धीमी रफ्तार को कमजोरी बताया है। 

हालांकि, कुछ समीक्षकों ने क्लाइमैक्स को फिल्म की बड़ी ताकत बताया है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिर्फ अगले पार्ट की तैयारी के लिए कहानी को अधूरा छोड़ने के बजाय अपेक्षाकृत पूरा अंत देने की कोशिश करती है। 

फैसला

‘मिर्जापुर: द मूवी’ मुख्य रूप से पुराने ‘मिर्जापुर’ फैंस के लिए बनाई गई फिल्म है। पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु और अली फजल की वापसी, रवि किशन की दमदार एंट्री और पुराने किरदारों के बीच सत्ता की जंग फिल्म को देखने लायक बनाती है। हालांकि, लंबा रनटाइम और दूसरे हिस्से की धीमी रफ्तार कुछ दर्शकों को परेशान कर सकती है।

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