अरुशा (तंजानिया), 7 अक्टूबर। इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) की 153वीं विधानसभा में भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की कथित बयानबाजी पर कड़ा जवाब दिया। तंजानिया के अरुशा में आयोजित IPU सभा में भारत के अधिकार के तहत जवाब देते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने पाकिस्तान पर बहुपक्षीय मंच का राजनीतिक इस्तेमाल करने और भारत के खिलाफ कथित तौर पर बेबुनियाद प्रचार करने का आरोप लगाया।

हरिवंश ने कहा कि किसी भी देश का बयान या प्रचार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की भारत के साथ स्थिति को नहीं बदल सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

IPU मंच के राजनीतिक इस्तेमाल पर जताई आपत्ति

पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का संदर्भ दिए जाने पर जवाब देते हुए हरिवंश ने कहा कि भारत ऐसे प्रयासों की निंदा करता है, जिनके जरिए किसी प्रतिनिधिमंडल द्वारा मंच को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को बैठक या मंच के दायरे में लाने का प्रयास अनुचित है। हरिवंश ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल आदतन भारत के खिलाफ प्रचार करता है और बेबुनियाद आरोप लगाता है।

राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे।

हरिवंश बोले- भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं

हरिवंश ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को पूरी तरह कानूनी और अपरिवर्तनीय बताते हुए पाकिस्तान के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का बयानबाजी और प्रचार इस तथ्य को नहीं बदल सकता।

उन्होंने पाकिस्तान पर भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का अधिकार नहीं होने की बात कही। साथ ही आरोप लगाया कि पाकिस्तान भारत के क्षेत्रों पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है और उसे उन क्षेत्रों को खाली करना चाहिए।

हरिवंश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग विकास और लोकतंत्र के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में वर्ष 2024 में हुए आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत का भी उल्लेख किया।

जम्मू-कश्मीर में मतदान और पर्यटन का किया जिक्र

राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि वर्ष 2024 के आम चुनाव में जम्मू-कश्मीर में 58.5 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसे उन्होंने पिछले 35 वर्षों में सबसे अधिक बताया। वहीं, विधानसभा चुनाव में 63 प्रतिशत मतदान होने का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले वर्ष पर्यटकों की संख्या में भी रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। हरिवंश ने इन आंकड़ों का उल्लेख क्षेत्र में विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के संदर्भ में किया।

पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख

भारत के पाकिस्तान के खिलाफ कड़े रुख के संदर्भ में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया। दिए गए विवरण के अनुसार, इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और नागरिकों को निशाना बनाया गया था।

इसके बाद भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर शुरू किए जाने का उल्लेख किया गया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आतंकी ढांचे और प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाने की बात कही गई।

दिए गए विवरण में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की ओर से सैन्य गतिविधियां बढ़ाए जाने के बाद भारत ने उसके एयरबेस पर कार्रवाई की, जिसके बाद पाकिस्तान ने संघर्ष विराम की मांग की। इसके अलावा पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकवादियों के बाद में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा मारे जाने का भी उल्लेख किया गया।

IPU में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हरिवंश

हरिवंश रविवार को अरुशा पहुंचे थे, जहां वह 153वीं IPU विधानसभा और उससे जुड़े सत्रों में हिस्सा लेने वाले उच्चस्तरीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, 153वीं IPU विधानसभा का मुख्य विषय “समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को बढ़ाना और समुदायों को सशक्त बनाना” है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में हरिवंश के साथ लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, संजय जायसवाल, कमलजीत सहरावत, लता वानखेड़े, बिजुली कलिता मेधी और एन. के. प्रेमचंद्रन तथा राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा शामिल हैं।

वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेगा प्रतिनिधिमंडल

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न बैठकों, पैनल चर्चाओं और कार्यशालाओं में भाग लेगा। इन सत्रों में समकालीन वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी और भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन विषयों पर भारत का दृष्टिकोण रखेगा।

सचिवालय ने भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को IPU के साथ भारत के निरंतर जुड़ाव और संसदीय कूटनीति, बहुपक्षीय संवाद तथा विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

इस दौरान वैश्विक शांति, विकास, लोकतंत्र और समुदायों के सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण रहेगी। जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की टिप्पणी के जवाब में हरिवंश का बयान इसी व्यापक संसदीय और कूटनीतिक मंच पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करने के रूप में सामने आया।