नई दिल्ली 23 अगस्त 2026। EPS-95 पेंशन को लेकर देशभर के लाखों पेंशनरों की नजर एक बार फिर सरकार के रुख पर है। लंबे समय से पेंशनर संगठन न्यूनतम मासिक पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही महंगाई राहत और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की मांग भी उठती रही है।

लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि 23 अगस्त 2026 तक ₹7,500 न्यूनतम EPS-95 पेंशन करने की कोई आधिकारिक मंजूरी या लागू होने की घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे “₹7,500 पेंशन मंजूर” जैसे दावों को आधिकारिक आदेश के बिना सही नहीं माना जा सकता।

₹1,000 से ₹7,500 की मांग क्यों उठ रही है?

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1 सितंबर 2014 से ₹1,000 प्रति माह किया गया था। EPFO के मौजूदा नियमों में भी न्यूनतम पेंशन ₹1,000 का प्रावधान मौजूद है।

पेंशनरों का तर्क है कि पिछले वर्षों में महंगाई और रोजमर्रा के खर्च काफी बढ़ गए हैं। ऐसे में ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन से बुजुर्ग पेंशनरों के लिए गुजारा करना मुश्किल है। इसी वजह से लंबे समय से ₹7,500 न्यूनतम पेंशन और महंगाई भत्ता देने की मांग की जा रही है।

सरकार का अब तक क्या रुख रहा है?

सरकार ने अलग-अलग संसदीय जवाबों में EPS-95 की वित्तीय संरचना और न्यूनतम पेंशन की मौजूदा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी है।

EPS-95 एक Defined Contribution-Defined Benefit Social Security Scheme है। इसके फंड में नियोक्ता का योगदान और केंद्र सरकार का बजटीय योगदान शामिल होता है। सरकार ने यह भी बताया है कि न्यूनतम ₹1,000 पेंशन के लिए केंद्र बजटीय सहायता देता है।

पुराने संसदीय रिकॉर्ड में सरकार ने ₹7,500 न्यूनतम पेंशन के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था और योजना की वित्तीय संरचना का हवाला दिया था।

इसलिए आज की तारीख में यह कहना कि “सरकार ने ₹7,500 पेंशन मंजूर कर दी है”, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

फिर पेंशनरों को कब मिलेगी बड़ी राहत?

यही वह सवाल है जिसका इंतजार EPS-95 पेंशनर कर रहे हैं।

₹7,500 की मांग को लेकर पेंशनर संगठन लगातार सरकार के सामने अपनी बात रखते रहे हैं। लेकिन किसी भी नई न्यूनतम पेंशन राशि के लागू होने के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा और संबंधित नियम/आदेश जरूरी होगा।

जब तक ऐसा आदेश नहीं आता, मौजूदा न्यूनतम पेंशन व्यवस्था को ही लागू माना जाएगा।

Higher Pension और ₹7,500 Pension में अंतर समझिए

कई लोगों को Higher Pension on Higher Wages और ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग एक ही चीज लगती है, जबकि दोनों अलग मुद्दे हैं।

Higher Pension में पात्र कर्मचारी के पेंशन योग्य वेतन और सेवा अवधि के आधार पर पेंशन की गणना होती है। सरकार द्वारा मार्च 2026 में दिए गए संसदीय जवाब के अनुसार EPS पेंशन की गणना का मूल सूत्र है:

मासिक पेंशन = पेंशन योग्य सेवा × पेंशन योग्य वेतन ÷ 70।

वहीं ₹7,500 की मांग का मतलब है कि EPS-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन की सीमा बढ़ाई जाए।

यानी किसी व्यक्ति का Higher Pension मामला चल रहा है तो उसे सीधे ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

बागपत और पश्चिमी यूपी के पेंशनरों के लिए जरूरी बात

बागपत, बड़ौत, खेकड़ा, मेरठ, गाजियाबाद, शामली और मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग EPFO और EPS से जुड़े हैं।

अगर आप EPS-95 के पेंशनर हैं तो ₹7,500 की खबरों को लेकर सबसे पहले यह जांचें कि जानकारी सरकारी आदेश पर आधारित है या सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर।

EPFO के Pensioners Portal पर PPO नंबर के जरिए पेंशन स्टेटस और भुगतान से संबंधित जानकारी देखी जा सकती है।

EPFO की ओर से वर्तमान में पेंशन और अन्य सेवाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल उपलब्ध है। हालिया सिस्टम अपग्रेड के बाद EPFO ने सदस्यों को यह भी बताया है कि कुछ सेवाओं के प्रोसेसिंग में अस्थायी रूप से सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

वायरल मैसेज से रहें सावधान

इन दिनों EPS-95 को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होते हैं—कहीं ₹7,500 पेंशन लागू होने की बात होती है तो कहीं नई तारीख बताई जाती है।

पेंशनरों को सलाह है कि बिना सरकारी अधिसूचना के किसी भी रकम या तारीख को पक्की खबर न मानें।

खासकर OTP, UAN, बैंक खाते या PPO से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

अब सबसे बड़ा सवाल: ₹7,500 कब?

EPS-95 पेंशनरों की ₹1,000 से ₹7,500 न्यूनतम पेंशन करने की मांग अभी भी बड़ा मुद्दा है। लेकिन 23 अगस्त 2026 तक इसे लागू करने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि मांग जारी है, लेकिन ₹7,500 अभी मंजूर न्यूनतम पेंशन नहीं है।

अब पेंशनरों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। अगर सरकार न्यूनतम पेंशन में बदलाव करती है तो इसका सीधा असर देशभर के EPS-95 पेंशनरों पर पड़ेगा।

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