लखनऊ, 13 अगस्त : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने नोएडा स्थित डेटा सेंटर पार्क में बिजली की आपूर्ति एवं वितरण के लिए अडानी समूह की कंपनियों की ओर से पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने का विरोध किया है। समिति ने इसे उत्तर प्रदेश में “बैकडोर” से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास बताते हुए कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय यदि बड़े और अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं, विशेषकर डेटा सेंटर जैसे उच्च विद्युत खपत वाले प्रतिष्ठानों को निजी कंपनियों के पैरेलल लाइसेंस के माध्यम से सरकारी वितरण निगमों से अलग किया जाता है तो इसका सीधा असर निगमों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सबसे अधिक राजस्व वाले वितरण निगमों में शामिल है और यदि बड़े एवं लाभकारी उपभोक्ता निजी कंपनियों के पास चले जाते हैं तो उसका राजस्व आधार कमजोर होगा। दूसरी ओर निजी कंपनियों को सरकारी नेटवर्क का उपयोग करते हुए लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने का अवसर मिलेगा।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि अडानी समूह की कंपनियां पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के माध्यम से पश्चिमांचल क्षेत्र से बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रवेश की शुरुआत कर रही हैं। समिति के अनुसार यह केवल नोएडा के एक डेटा सेंटर तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि भविष्य में मध्यांचल समेत प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में निजी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता खोल सकता है।
समिति ने कहा कि पैरेलल लाइसेंस को किसी एक उपभोक्ता या डेटा सेंटर तक सीमित व्यवस्था मानना उचित नहीं होगा। यदि इसकी अनुमति मिलती है तो बड़े औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को सरकारी वितरण कंपनियों से अलग कर निजी कंपनियों को देने का रास्ता खुल सकता है। समिति ने इसे क्रमिक निजीकरण की प्रक्रिया करार दिया।
संघर्ष समिति ने स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों के स्वामित्व में बदलाव का भी मुद्दा उठाया। समिति का कहना है कि इंटेली स्मार्ट का अडानी समूह द्वारा अधिग्रहण किए जाने और पोलारिस के अधिग्रहण की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है। समिति ने सवाल उठाया कि स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों के बड़े निजी बिजली कारोबारियों के साथ एकीकरण और पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस की प्रक्रिया साथ-साथ आगे बढ़ने से क्या भविष्य में बिजली वितरण के निजीकरण का आधार तैयार किया जा रहा है।
समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं से संबंधित डेटा, बिलिंग और राजस्व संग्रह व्यवस्था निजी कंपनियों के प्रभाव क्षेत्र में जाने की आशंका है। इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी एवं सार्वजनिक जांच आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। समिति के अनुसार संबंधित कंपनी ने पांच अगस्त 2026 को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए आवेदन किया, लेकिन आवेदन को आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने में विलंब हुआ और विज्ञापन जारी होने से करीब दो दिन पहले इसे वेबसाइट पर डाला गया।
समिति ने कहा कि बिजली जैसे सार्वजनिक महत्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाइसेंस प्रक्रिया को जल्दबाजी और सीमित सार्वजनिक सूचना के साथ आगे बढ़ाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उसने आयोग से आवेदन, संलग्न दस्तावेज, प्रस्तावित क्षेत्र, संबंधित उपभोक्ताओं का विवरण, नेटवर्क इस्तेमाल की शर्तें और सरकारी वितरण निगम पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव को सार्वजनिक करने की मांग की।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार और विद्युत नियामक आयोग से नोएडा डेटा सेंटर के लिए प्रस्तावित पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस की प्रक्रिया तत्काल रोकने, पूरे मामले की सार्वजनिक समीक्षा कराने तथा किसी भी रूप में बिजली के निजीकरण की अनुमति नहीं देने की मांग की। समिति ने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो बिजली कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे।