मुंबई, 7 अक्टूबर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी संपत्तियों के ऊंचे मूल्यांकन को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के लिए प्रमुख नकारात्मक जोखिमों में शामिल किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में संभावित सख्ती और सार्वजनिक कर्ज का ऊंचा स्तर भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 की मौद्रिक नीति वक्तव्य में वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब तक लचीली बनी हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के दोबारा बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक आर्थिक वातावरण में अनिश्चितता बढ़ाई है।
RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के सामने कई महत्वपूर्ण नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। इनमें वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों का और सख्त होना, AI से जुड़ी संपत्तियों के मूल्यांकन का ऊंचे स्तर पर बने रहना और सार्वजनिक कर्ज का उच्च स्तर शामिल है।
AI एसेट वैल्यूएशन पर RBI की नजर
RBI की ओर से AI से संबंधित संपत्तियों के मूल्यांकन का उल्लेख वैश्विक वित्तीय और आर्थिक परिस्थितियों के व्यापक जोखिम आकलन का हिस्सा है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि AI से जुड़ी संपत्तियों का ऊंचा मूल्यांकन वैश्विक वित्तीय स्थिरता और आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हो सकता है।
RBI ने इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के समाधान को लेकर अनिश्चितता पर भी चिंता जताई। केंद्रीय बैंक के अनुसार, संघर्ष की स्थिति और उससे जुड़े ऊर्जा बाजार के प्रभाव वैश्विक आर्थिक गतिविधियों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव
केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई तेज हुई है। इसके चलते मौद्रिक नीति का रुख भी अधिक सख्त होने की ओर बढ़ा है।
RBI के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में अपनी नीतिगत दर में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की। इसके अलावा अन्य प्रमुख प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण केंद्रीय बैंकों की ओर से दरों में सख्ती ने भी वैश्विक नीतिगत दरों के ऊंचे रहने की उम्मीदों को मजबूत किया है।
वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने का असर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। RBI ने इसी व्यापक संदर्भ में वैश्विक वित्तीय स्थितियों, भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों से जुड़े जोखिमों को रेखांकित किया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर RBI का भरोसा
वैश्विक जोखिमों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बताया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो अपेक्षाओं से अधिक थी।
केंद्रीय बैंक के अनुसार मजबूत निजी खपत और स्थिर पूंजी निवेश ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया। इसके साथ ही वस्तु निर्यात में सुधार और सेवाओं के निर्यात में लगातार वृद्धि ने भी अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को गति दी।
आपूर्ति पक्ष पर विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत वृद्धि दर्ज की, जबकि घरेलू और बाहरी मांग के सहारे सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में भी मजबूती आई।
दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कायम
RBI ने कहा कि जुलाई और अगस्त के उपलब्ध उच्च आवृत्ति वाले संकेतक बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में घरेलू आर्थिक गतिविधियों की गति बनी हुई है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार घरेलू मांग लचीली बनी हुई है। मजबूत बाहरी मांग से भी इसे समर्थन मिल रहा है। वस्तु निर्यात में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज होने का उल्लेख करते हुए RBI ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े दबावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आपूर्ति स्रोतों में विविधता से दबाव कम करने की कोशिश
RBI ने कहा कि ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े संभावित प्रतिकूल प्रभावों को आपूर्ति स्रोतों में सक्रिय विविधता के जरिए सीमित किया जा रहा है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, वैश्विक स्तर पर उत्पन्न होने वाले इन दबावों के बीच आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों की दिशा में उठाए गए कदमों से संभावित प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है।
कमजोर मानसून और El Niño से घरेलू जोखिम
RBI ने घरेलू अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जोखिमों का भी उल्लेख किया। केंद्रीय बैंक के अनुसार कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत El Niño परिस्थितियां कृषि तथा ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
हालांकि, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और सरकार की सक्रिय पहल इन जोखिमों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती हैं। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र में जारी गति और रोजगार की व्यापक रूप से स्थिर स्थिति से शहरी मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
RBI ने कहा कि मजबूत क्षमता उपयोग, ऋण प्रवाह में मजबूती और सरकार के बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर जोर से निवेश गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
2026-27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत रखा है।
इस संशोधन से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक को घरेलू आर्थिक गतिविधियों में पहले के अनुमान की तुलना में अधिक मजबूती की उम्मीद है।
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