6 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

विशाखापत्तनम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में स्वदेशी जहाज निर्माण और समुद्री बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं को देश की नौसैनिक और समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने पहले Fleet Support Ship (FSS-1) का लॉन्च किया, जिसे ‘सूर्या’ नाम दिया गया है। इसके अलावा उन्होंने पांचवें Fleet Support Ship (FSS-5) की कील रखी। HSL में नए स्लिपवे और क्रेन समेत उन्नत बुनियादी ढांचे का भी उद्घाटन किया गया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ही स्थान और एक ही अवसर पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का एक साथ आगे बढ़ना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम बताया।

नए स्लिपवे और क्रेन का भी उद्घाटन

HSL में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नए स्लिपवे और गोला-बार क्रेन का उद्घाटन, नए Fleet Support Ship की कील रखना और FSS-1 ‘सूर्या’ का लॉन्च अलग-अलग उपलब्धियां हैं, लेकिन एक ही स्थान पर इन सभी गतिविधियों का होना इनके महत्व को और बढ़ाता है।

रक्षा मंत्री ने जहाज निर्माण बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को देश की समुद्री सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि कील रखना भारत के संकल्प का प्रतीक है, जबकि नया स्लिपवे देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि HSL में केवल जहाजों का निर्माण ही नहीं हो रहा है, बल्कि भारत की भविष्य की समुद्री शक्ति की नींव को भी मजबूत किया जा रहा है।

‘सूर्या’ के लॉन्च से नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती

कार्यक्रम में लॉन्च किए गए Fleet Support Ship-1 को ‘सूर्या’ नाम दिया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पोत का लॉन्च भारतीय नौसेना की पहुंच, सहनशक्ति और परिचालन प्रभावशीलता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Fleet Support Ship के जरिए नौसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। रक्षा मंत्री ने समुद्री क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और नौसेना की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया।

भारत की प्राचीन समुद्री विरासत का किया उल्लेख

राजनाथ सिंह ने भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश जब आज एक बड़ी समुद्री शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो यह किसी बिल्कुल नए अध्याय की शुरुआत नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत सदियों पहले स्थापित अपनी गौरवशाली समुद्री विरासत को फिर से सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस समुद्री यात्रा में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात भी उन्होंने कही।

रक्षा मंत्री ने HSL को भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक बताया। उन्होंने कहा कि आठ दशकों से अधिक समय से HSL देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

HSL के Miniratna Category-I बनने की सराहना

राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की वित्तीय और परिचालन स्थिति में आए सुधार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आने के बाद मंत्रालय के प्रयासों और HSL के कर्मचारियों की मेहनत से कंपनी की वित्तीय स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में HSL का Miniratna Category-I का दर्जा हासिल करना पिछले वर्षों में किए गए प्रयासों और संस्थान के बदलाव का प्रमाण है।

रक्षा मंत्री ने HSL की लंबे समय से चली आ रही भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्थान देश की रणनीतिक और रक्षा जरूरतों के लिए आठ दशकों से अधिक समय से काम कर रहा है।

नौसेना, DRDO, उद्योग और स्टार्टअप के बीच तालमेल पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री ताकत केवल नौसेना या जहाज निर्माण कंपनियों के प्रयासों से नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जरूरी है।

उन्होंने नौसेना, HSL, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), शिक्षण संस्थानों, उद्योग, MSME और स्टार्टअप को एक टीम के रूप में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनाथ सिंह के अनुसार, समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने रक्षा और समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।

हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना

रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में First Responder और Preferred Security Partner के तौर पर अपनी क्षमता बार-बार साबित की है।

उन्होंने मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी अभियानों, निकासी मिशनों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नौसेना की भूमिका का उल्लेख किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने विभिन्न परिस्थितियों में अपनी तैयारी और दृढ़ता का प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार, नए Fleet Support Ship का लॉन्च नौसेना की पहुंच और परिचालन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देने पर फोकस

HSL में मंगलवार को हुए कार्यक्रम में जहाज निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम एक साथ आगे बढ़े। नए स्लिपवे और क्रेन जैसे बुनियादी ढांचे के उद्घाटन के साथ नए Fleet Support Ship की कील रखी गई और FSS-1 ‘सूर्या’ को लॉन्च किया गया।

इन परियोजनाओं के जरिए भारत के समुद्री और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। रक्षा मंत्री ने भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत, आधुनिक जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ते हुए देश की समुद्री शक्ति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

विशाखापत्तनम में HSL के इस कार्यक्रम में जहाज निर्माण के साथ-साथ समुद्री बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और विभिन्न संस्थानों के

Rajnath Singh, Hindustan Shipyard Limited, HSL, Fleet Support Ship, Surya, Indian Navy, Defence News, Visakhapatnam, Maritime Security, Indigenous Shipbuilding, आत्मनिर्भर भारत#RajnathSingh #HSL #FleetSupportShip #Surya #IndianNavy #DefenceNews #Visakhapatnam #MaritimeSecurity #IndigenousShipbuilding #IndiaDefence