प्रकाशन तिथि: 29 सितंबर 2026 | Baghpat Wire
नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने चुनाव आयोग को इस विवाद का निपटारा चार महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है। साथ ही, दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे और जवाबी हलफनामे दाखिल करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में दलीलें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पार्टी के मूल नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ को फ्रीज कर दिया गया था।
चार महीने में विवाद सुलझाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न से संबंधित विवाद का चार महीने के भीतर निपटारा करे। अदालत ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने के लिए दोनों पक्षों को चार सप्ताह के अंदर अपने हलफनामे और जवाबी हलफनामे दाखिल करने को कहा है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में दलीलें तय समय सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए, ताकि विवाद का निपटारा निर्धारित अवधि में किया जा सके।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से दलील दी गई कि चुनाव चिह्न से जुड़े विवादों में बड़ी संख्या में हलफनामे दाखिल किए जाते हैं। ऐसे मामलों की प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है। आयोग की इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल का सुझाव दिया।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत पार्टी के मूल नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था।
चुनाव आयोग ने विवाद के निपटारे तक दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। इसके तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अंतरिम रूप से ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
इस अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग को निर्धारित समय सीमा के भीतर इस विवाद पर अंतिम फैसला करना होगा।
दोनों पक्षों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बंद्योपाध्याय ने पीठ को बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने जुलाई में ही अपना जवाब दाखिल कर दिया था। हालांकि, विरोधी गुट की ओर से अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
इस पर अदालत ने दोनों पक्षों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रक्रिया को तय समय में पूरा किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग विवाद का जल्द निपटारा कर सके।
एआई के इस्तेमाल का सुझाव
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने बड़ी संख्या में हलफनामे और दस्तावेज होने के कारण ऐसे विवादों के निपटारे में लगने वाले समय का उल्लेख किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल का सुझाव दिया।
अदालत का यह सुझाव चुनाव चिह्न से जुड़े विवादों में दस्तावेजों की जांच और प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के संदर्भ में आया।
हालांकि, मामले के अंतिम निपटारे की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की ही होगी। आयोग को दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करते हुए चार महीने के भीतर फैसला करना है।
अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के निपटारे की समय सीमा निर्धारित हो गई है। दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपने जवाब दाखिल करने होंगे और चुनाव आयोग को चार महीने में मामले का निपटारा करना होगा।
फिलहाल, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और अरूप रॉय गुट को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित हैं। विवाद का अंतिम फैसला आने तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आयोग को दोनों पक्षों के दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करते हुए निर्धारित समय में विवाद का निपटारा करना है।
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