मुजफ्फरनगर, 20 सितंबर 2026: राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर में आयोजित सामाजिक समरसता कार्यक्रम में जाति की राजनीति, सामाजिक बराबरी, किसान, नौजवान और 2027 के चुनावी मुद्दों को लेकर कई अहम बातें कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने चौधरी चरण सिंह, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संत रविदास के विचारों का उल्लेख करते हुए सामाजिक एकता और संवाद पर जोर दिया।
‘गिरा हुआ समाज’ वाली टिप्पणी पर जयंत का सवाल
जयंत चौधरी ने अपने भाषण में विपक्ष के एक नेता की कथित टिप्पणी का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि किस समाज को “गिरा हुआ समाज” बताया गया था। उन्होंने कहा कि जिस समाज से चौधरी चरण सिंह और अहिल्याबाई होलकर जैसे व्यक्तित्व जुड़े हैं और जिसे उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से भी जोड़ा, उस समाज के बारे में ऐसी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि उनके दल का कोई प्रदेश अध्यक्ष किसी समाज के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो वह उसके खिलाफ खड़े होंगे। उनके मुताबिक समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा केवल व्यक्तिगत राजनीति का विषय नहीं है।
‘मेरा और आपका संबंध जाति का नहीं’
जाति की राजनीति को लेकर जयंत चौधरी ने कहा कि लोगों से संपर्क केवल रिश्तेदारी या जाति के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरएलडी कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और बस्तियों में जाकर लोगों से संवाद करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से संबंध बनाने की कोशिश होती है तो अक्सर सबसे पहले जाति का सवाल सामने आता है। इसके बजाय उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता के साथ संबंध जाति का नहीं, बल्कि चौधरी चरण सिंह की विचारधारा का होना चाहिए।
‘क्या आज किसी नेता में जाति का नाम हटाने की हिम्मत है?’
जयंत चौधरी ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तक Annihilation of Caste का उल्लेख करते हुए जाति व्यवस्था पर उनके विचारों की चर्चा की।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह के जाति व्यवस्था के खिलाफ रुख का भी जिक्र किया। जयंत चौधरी ने कहा कि एक समय शिक्षण संस्थानों के नामों में जातिगत पहचान जुड़ी होती थी और चौधरी चरण सिंह ने शिक्षा संस्थानों से जाति के नाम हटाने की पहल की थी।
इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि “आज किसी नेता में हिम्मत है कि कह दे कि अगर उस नेता की जाति का नाम किसी संस्था में लिखा हो तो वह जाकर कह दे कि नहीं, इस जाति का नाम नहीं होना चाहिए?”
गन्ने और इथेनॉल से जुड़े मुद्दे भी उठाए
जयंत चौधरी ने गन्ना किसानों और इथेनॉल नीति पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने अपने भाषण में 2016-17 और पिछले सत्र के गन्ने के भाव तथा चीनी मिलों द्वारा किसानों के भुगतान से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि इथेनॉल नीति से गन्ने की खरीद और भुगतान में किसानों को लाभ हुआ है। साथ ही उन्होंने गुड़, कोल्हू-खानसारी इकाइयों और किसानों से सीधे खरीद करने वाले उद्योगों को भी लाभ मिलने की बात कही।
जयंत चौधरी ने कहा कि किसान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से होने चाहिए और किसान की फसल की पर्ची को उसका अधिकार बताया।
2027 के लिए किसान, नौजवान और शिक्षा पर सवाल
अपने संबोधन में जयंत चौधरी ने 2027 की राजनीति के संदर्भ में किसान और नौजवानों से जुड़े सवालों को प्रमुखता दी। उन्होंने छोटे किसानों, सीमित जमीन वाले युवाओं, खेती करने लेकिन जमीन के अधिकार से वंचित लोगों और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि नौजवानों को व्यवस्था से सवाल करने चाहिए। किसानों के लिए भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि उनकी फसल का उचित मूल्य क्यों नहीं मिल रहा।
जयंत चौधरी ने कहा कि “इस चुनाव की तकदीर भी इन्हीं सवालों के इर्दगिर्द रहनी चाहिए।”
‘भेदभाव नहीं समानता, दूरी नहीं संवाद’
कार्यक्रम के अंत में जयंत चौधरी ने आरएलडी कार्यकर्ताओं से समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रयास भेदभाव और दूरी कम करने तथा संवाद, समन्वय और साझीदारी बढ़ाने का होना चाहिए।
उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि मंत्र होना चाहिए—“भेदभाव नहीं समानता, दूरी नहीं संवाद और टकराव नहीं समन्वय और साझीदारी।”
मुजफ्फरनगर में जयंत चौधरी के संबोधन में सामाजिक समरसता के साथ जाति की राजनीति, किसान, गन्ना-इथेनॉल, नौजवान, शिक्षा और 2027 के चुनावी मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।
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